
मुंबई। आईआईटी में दाखिला लेने वाली लड़कियों की संख्या में इस वर्ष मामूली इजाफा हुआ है। पिछले वर्ष के आठ फीसद के मुकाबले इस वर्ष के बैच में नौ फीसद लड़कियों ने दाखिला लिया है। यानी इस वर्ष प्रमुख संस्थानों के कैंपस में पिछले साल के मुकाबले 40 अधिक लड़कियां पढ़ रही हैं।
पहले ज्वाइंट सीट आवंटन की प्रक्रिया के दौरान देश की 18 आईआईटी में 9,974 छात्रों ने हिस्सा लिया, जिसमें से 900 लड़कियां हैं। आईआईटी के लिए क्वालीफाई करने वाले कुछ छात्रों की संख्या में लड़कियों की संख्या सिर्फ 11 फीसद है। सीटों के आवंटन के बाद प्रमुख संस्थानों में महज 900 छात्राओं को ही दाखिला मिला।
यह भी पढ़ें : फिरौती नहीं शादी के लिए हुए सबसे ज्यादा अपहरण
आईआईटी की परीक्षा के आवेदन करने वाले कुछ छात्रों की संख्या में करीब 18 फीसद लड़कियों ने आवेदन किया था। इंजीनियरिंग कॉलेजों में लड़कियों की कम संख्या के लिए प्रोफेसर लोगों की मानसिकता को जिम्मेदार मानते हैं। आईआईटी-रुढ़की के निदेशक प्रदीप्ता बैनर्जी ने बताया कि अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में लड़कियों का प्रतिनिधित्व काफी कम है, लेकिन उनकी सफलता का प्रतिशत लड़कों से अधिक है।
उन्होंने बताया कि जेईई (मेन) में अधिक लड़कियां नहीं आ रही हैं, इसलिए हमें जेईई (एडवांस) में भी कम लड़कियां मिल रही हैं। मगर पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर कैंपस में लड़कियों की संख्या अधिक है। रुढ़की कैंपस में डॉक्टरेट करने वाली छात्राओं की संख्या 44 फीसद है।
यह भी पढ़ें : AI : चीफ ऑफ फ्लाइट सेफ्टी बनी महिला ने कभी नहीं उड़ाया विमान
आईआईटी बॉम्बे के एक प्रोफेसर ने बताया कि आईआईटी में पूरे देश से बच्चे आते हैं, ऐसे में लोगों की मानसिकता जल्द बदलने की उम्मीद करना कठिन होगा। आईआईटी बॉम्बे के निदेशक देवांग खाखर ने बताया कि आईआईटी ने लड़कियों के लिए प्रवेश परीक्षा की फीस घटाकर आधी कर दी है।
देवांग ने बताया कि पिछले साल प्लेसमेंट के दौरान सोशल नेटवर्किंग साइट की ओर से पांच छात्रों को दिए गए शीर्ष ऑफर में दो लड़कियों को मिले थे।