
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ हफ्तों के दौरान आतंकवादी वारदातों में तेजी आई है। इसका सीधा संबंध स्थानीय युवाओं के आतंकवादी संगठनों में शामिल होने के कारण है। राज्य के पुलिस विभाग और सेना का कहना है कि पिछले कुछ समय में युवा कश्मीरी बड़ी तादाद में आतंकी संगठनों में शामिल हो रहे हैं। सुरक्षा के लिहाज से यह बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है।
पिछले हफ्ते उधमपुर से पकड़े गए लश्कर के आतंकी नावेद को स्थानीय लोगों की ओर से मदद मिलने के बाद सेना और पुलिस के लिए स्थितियां काफी चिंताजनक हो गई हैं। नावेद और उसके साथी कई दिनों तक पुलिस और सेना से छुपकर रहने में इसलिए कामयाब हो गए क्योंकि उन्हें स्थानीय लोगों का समर्थन हासिल था।
यह भी पढ़ें : पाकिस्तानी आतंकी नावेद एक सप्ताह के पुलिस रिमांड पर
पुलिस और सेना को आशंका है कि भविष्य में इस तरह के समर्थन से आतंकियों को अपनी पैठ बनाने और आतंकी वारदातों को अंजाम देने में काफी मदद मिलेगी। खुफिया एजेंसी के एक सूत्र ने बताया कि 2010 में आतंकी संगठनों में शामिल लोगों में बाहरी तत्वों की संख्या जहां 60 फीसदी थी।
वर्तमान में आतंकी संगठनों में स्थानीय आतंकियों का अनुपात 60 : 40 का है। उनकी कुल संख्या में कमी आई है, लेकिन अनुपात में बढ़ोतरी होना खतरनाक संकेत है। खुफिया एजेंसियों के एक अनुमान के मुताबिक पिछले साल कश्मीर में सक्रिय आतंकियों की संख्या 105 के करीब थी, लेकिन इस साल यह तादाद बढ़ गई है।
यह भी पढ़ें : बॉलीवुड फिल्म फैंटम के खिलाफ बैन के लिए कोर्ट पहुंचा आतंकी हाफिज सईद
जम्मू कश्मीर के डीजीपी के राजेंद्र कुमार ने हमसे बातचीत में बताया कि आतंकी संगठनों द्वारा स्थानीय कश्मीरी युवाओं की भर्ती और सीमारेखा के अंदर घुसपैठ करने की बढ़ती घटनाओं के बीच एक जाहिरी संबंध है। उन्होंने कहा कि ऐसी वारदातें बताती हैं कि घाटी में अलगाववादी तत्वों को भड़काने और उनके पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।