
कैथल। मां हर विपरीत परिस्थति से गुजर कर भी बच्चों को स्नेह की छाया प्रदान करती आई है। इसलिए मां को ममता की मूर्त का दर्जा हासिल है। इसके विपरीत कलायत में एक जननी ने अपनी 9 माह और तीन साल की दो बच्चियों को संकट के तूफान में छोड़कर मानवता की हर सीमा को लांघ दिया।
मासूम को त्यागने का यह कदम उसने चोरी छिपे नहीं उठाया, बल्कि कैथल महिला सेल में अधिकारियों व भरी पंचायत के बीच उठाया। प्रभावित बेटियों के पिता मुकेश कुमार का कहना है कि परिवार व उनके साथ गई पंचायत लगातार पत्नी को ससुराल लाने की अपील करती रही।
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पत्नी ने जहां स्वयं घर आने से इंकार कर दिया वहीं 9 माह की तानिया और तीन साल की ऋतिका को ठुकराते हुए जमीन पर फेंक दिया। इस पर भी दूसरे पक्ष की ओर से आए पंचायत प्रतिनिधि मूक दर्शक बने सब कुछ देखते हुए वहां से चलते बने।
बिलख रही बच्चियों की हालत पर उनका पत्थर दिल नहीं पिघला। वर पक्ष के लोग इन नन्हीं परियों को इन हालातों में नहीं छोड़ सकते थे, लिहाजा वे उन्हें घर ले आए। दोनों मासूमों का मां के वियोग में रो-रोक बुरा हाल है। इन परिस्थितियों में मनोज की 65 वर्षीय नानी भागली बच्चियों को संभाल रही हैं।
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बताया जा रहा है कि नौ फरवरी 2010 को मुकेश कुमार व मुक्ति का विवाह हिंदू रीति रिवाज से हुआ था। घरेलू विवाद के चलते कुछ समय से पति पत्नी अलग रह रहे थे। पत्नी ने अब दोनों मासूमों को भी छोड़ दिया है।