
बरेली। बिसाहड़ा कांड के बाद साहित्य अकादमी अवॉर्ड लौटाकर केंद्र सरकार पर निशाना साधने वाले शायर मुनव्वर राना तीन तलाक के मुद्दे पर भी उलमा के साथ हैं। बोले, जब मुसलमान किसी दूसरे मुल्क का चांद देखकर ईद नहीं मनाते तो पाकिस्तान या बांग्लादेश जैसे कानून से धार्मिक मामले कैसे हल कर सकते हैं?
समान नागरिक संहिता कानून को भी उन्होंने बेवजह बताया। यह कहते हुए कि जिस देश में कुछ किमी पर हवा पानी बदल जाता है, वहां सबके लिए एक जैसा कानून कैसे संभव है। वह दैनिक जागरण के स्थापना दिवस पर आयोजित कवि सम्मेलन में हिस्सा लेने आए थे। जागरण ने उनसे विभिन्न मुद्दों पर बात की।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से दोस्ती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दुश्मनी के सवाल पर कहा कि, "यह सच नहीं है। सोनिया गांधी से एक बार मिला हूं। वह भी जब वह मेरी मां के इंतकाल पर घर आई थीं। जहां तक प्रधानमंत्री के विरोध का सवाल है तो वह देश के अंदरूनी मामलात को ठीक नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि उनके पास अच्छी टीम नहीं है। अकबर महान इसलिए हुआ क्योंकि उसके पास नौ रत्न थे।
पीएम को भी अच्छे सलाहकारों की जरूरत है। छह माह के लिए पीएम मुझे अपना मुशीर (सलाहकार) बनाकर देख लें, मुल्क के अंदरूनी हालात बदलने लगेंगे।" उन्होंने कहा कि महज जमीन पर झाड़ू लगाने से दिलों का मैल साफ नहीं होगा। यह भी कहा कि उन्हें ओहदा नहीं चाहिए।
जब साहित्य अकादमी अवॉर्ड लौटाया था, तभी कह दिया था अब कोई अवॉर्ड नहीं लूंगा। अब तो बस यही तमन्ना है, अच्छा हिंदुस्तान बनते हुए देखकर मौत आ जाए। पाकिस्तान चले जाने जैसी धमकियां मिलने पर कहा कि ऐसा कहना गाली है, इससे अच्छा होगा कि हमें गोली मार दी जाए।
आजम से बिल्ली पली नहीं, शेर पालेंगे
कैबिनेट मंत्री मुहम्मद आजम खां के यह कहने पर कि उन्हें प्रधानमंत्री बना दिया जाए तो देश ठीक तरह से चलने लगेगा, मुनव्वर ने कहा कि जो उप्र को सुधार नहीं सके, दिल्ली की बात कर रहे हैं। यह बिल्कुल वैसे ही है, जैसे बिल्ली पाल नहीं सके, कह रहे हैं शेर पालेंगे।