कमलेश शर्मा, बदायूं। लोक निर्माण विभाग में चौकीदार नन्नू पक्के नमाजी हैं, लेकिन नवरात्र उनके दिल बसता है। वह 20 वर्ष से पूरे विधि-विधान से नौ दिन का व्रत रखते हैं। न रोजा छोड़ा न नवरात्र का व्रत। मुस्लिम होने से नमाज का तरीका तो उन्हें पता है, लेकिन देवी की भक्ति वह अपनी श्रद्धा के हिसाब से करते हैं। नवरात्र का व्रत पूर्ण होने पर कन्या भोज भी करते हैं।
वैष्णो देवी से लेकर कांगड़ा देवी, नैना देवी और ज्वाला देवी की तीर्थ यात्रा भी कर आए। नौकरी में वह भले ही मामूली पद पर हैं, लेकिन सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल के मामले में उनसा दरियादिल जिले में तो फिलहाल कोई नहीं दिखा। उप्र के बदायूं जिले के खेड़ा नवादा स्थित अंबेडकर छात्रावास के निकट पत्नी और बेटे के साथ नन्नू किराये के मकान में रहते हैं।
मुस्लिम मकान मालिक को पहले ही बता दिया, वह पूजा-पाठ करते हैं। अगर कोई आपत्ति हो तो पहले ही बता दें। देवी के प्रति इनकी आस्था तब उत्पन्न हुई जब वह अपने परिवार के साथ इस्लामनगर के चमन मुहल्ला में रहते थे। पत्नी बानो बीमार हो गई, उपचार में सारा पैसा खर्च हो गया। उन दिनों वह बहुत परेशान थे। वह बताते हैं कि एक दिन सपने में मां काली के दर्शन हुए। उन्होंने पूछा करा लिया इलाज, बर्बाद कर लिया पैसा।
मैंने उनके हाथ जोड़ लिए और नींद खुल गई। अगले दिन ही मां काली की प्रतिमा लाकर उनकी पूजा शुरू कर दी। पत्नी की तबीयत में अप्रत्याशित सुधार आने लगा। आज की कसौटी पर यह बेशक अंधविश्वास है लेकिन, नन्नू के लिए आस्था। वह बताते हैं कि परिवार के लोगों ने उनकी मूर्ति पूजा का विरोध किया। किसी की भावना को आहत नहीं करना चाहते थे, इसलिए बदायूं में किराये का मकान लेकर रहने लगे। इनके तीन पुत्र और तीन पुत्रियां हैं। दो पुत्र और तीन पुत्रियों की शादी हो चुकी है। छोटा बेटा उनके साथ ही रहता है।
अन्य दोनों पुत्र इस्लामनगर में रहते हैं। बच्चे तो देवी की पूजा नहीं करते, लेकिन उनकी पत्नी पूजा में साथ रहती हैं। उन्होंने अपने घर में मां काली, देवी दुर्गा, भैरो, हनुमान जी का भी चित्र लगा रखा है। वह पूरी तरह शाकाहारी हैं। देवी के प्रति आस्था ऐसी बढ़ी कि वह वैष्णो देवी, कांगड़ा देवी, नैना देवी, चितापूर्णी, ज्वाला देवी की तीर्थयात्रा भी कर चुके हैं। नवरात्र का व्रत पूरे होने पर कन्या भोज भी कराते हैं।
वह कहते हैं कि अल्लाह की तरह देवी शक्ति भी असीम है। पूजा-अर्चना हम विधि-विधान से करते हैं, लेकिन किसी आडंबर में नहीं पड़ते। अंतरात्मा से जैसी आवाज निकलती है वैसा ही करते हैं। नन्नू का कहना है कि जाति-धर्म, इंसानियत से ऊपर नहीं हो सकते। वह कहते हैं कि जीवन पर नमाज पढ़ने के साथ देवी की आराधना भी करते रहेंगे।