नई दिल्ली (वर्षा सिंह)। इन दिनों दिल्ली के मामले में केन्द्र सरकार और दिल्ली सरकार (State Vs Union Territory) के बीच अधिकारों को लेकर विवाद चल रहा है। खास तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति के अधिकार को लेकर टकराव की स्थिति बन गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी वजह क्या है? राज्यों के मामले में केन्द्र को कितना दखल देने का अधिकार है या राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में क्या अंतर होता है? तो चलिए आज इस मुद्दे पर आपको विस्तार से जानकारी दें। भारत एक विशाल देश है, जो राज्यों (State) और केन्द्र शासित प्रदेशों (Union Territory) से मिलकर बना है। भारत में कुल 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। पहले हम आपको बताते हैं इन दोनों के बीच का अंतर।
भारतीय संविधान के अनुसार राज्य केंद्र से अलग एक स्वतंत्र इकाई (Independent Unit) होती है। राज्य अपनी सरकार को खुद चुनते हैं। इसके लिए चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से सरकार को चुना जाता है। संसद किसी राज्य विशेष के लिए नियम नहीं बना सकती। प्रत्येक राज्य में एक मुख्यमंत्री और विधानसभा होती है। भारत के 6 राज्यों ( आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट ) में विधानसभा के साथ विधान परिषद भी हैं। प्रत्येक राज्य में एक राज्यपाल भी होता है, जो कार्यकारी अध्यक्ष होता है और राज्य में राष्ट्रपति का प्रतिनिधि होता है।आम तौर पर एक UT की तुलना में राज्य की जनसंख्या और क्षेत्रफल अधिक होता है।
UT (Union Territories) यानी केंद्र शासित प्रदेश में नाम के मुताबिक केंद्र सरकार द्वारा शासन होता है। हालांकि, दिल्ली कुछ मामलों में यहां पर अपवाद है। केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्र सरकार की ओर से उपराज्यपाल को नियुक्त किया जाता है। एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा हो भी सकती है और नहीं भी। उदाहरण के तौर पर संविधान में 69वें संशोधन, एक्ट 1991 के तहत दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) का दर्जा प्राप्त हुआ था। इसके साथ ही यहां पर विधानसभा के गठन का भी प्रावधान है। पुड्डुचेरी में भी विधानसभा है। केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष कानून बनाने पर केंद्र सरकार से भी मंजूरी लेनी होती है।
राज्यपाल (Governor) किसी राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है, जबकि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर, पुड्डुचेरी और दिल्ली में उपराज्यपाल (Who is lieutenant governor) की नियुक्ति केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर होती है। किसी राज्य में मुख्यमंत्री ही असली शासक होता है और राज्यपाल की शक्तियां नाममात्र की होती हैं। लेकिन केंद्र शासित प्रदेश में उपराज्यपाल वास्तविक प्रशासक होता हैं और मुख्यमंत्री की शक्तियां नाममात्र की होती है। अभी सिर्फ दिल्ली और पुडुचेरी में निर्वाचित सरकार है। जम्मू-कश्मीर में फिलहाल निर्वाचित सरकार नहीं है, तो वहां पर उपराज्यपाल ही मुख्य है। इन जगहों पर उपराज्यपाल (Lieutenant Governor or LG), केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर काम करता है। केंद्र सरकार इनके माध्यम से उस प्रदेश में शासन करती है।
उपराज्यपाल विधानसभा का सत्र बुलाते हैं। उपराज्यपाल के पास विधानसभा के विघटन और स्थगन करने का अधिकार होता है। उपराज्यपाल किसी भी मुद्दे पर या लंबित विधेयक पर राज्य विधान सभा को संदेश भेजने का अधिकार रखते हैं। उपराज्यपाल के पास वित्तीय और गैर-वित्तीय बिल को पास करने या न करने का अधिकार होता है। बिलों को विधान सभा में पेश करने से पहले उपराज्यपाल की सहमति की आवश्यकता होती है।
राज्यों के संवैधानिक प्रमुख को राज्यपाल कहा जाता है। वह राज्य की कार्यपालिका का प्रमुख होता है। यह राज्य में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है। राज्यपाल, उस राज्य में मंत्री परिषद की सलाह के अनुसार कार्य करता है। राज्यपाल न केवल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है बल्कि उनकी सलाह पर राज्य की मंत्रिपरिषद के अन्य मंत्रियों की भी नियुक्ति करता है। वह सामान्यत: राज्य की विधान सभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करता है, लेकिन अगर किसी एक दल को बहुमत न मिला हो तो ऐसे गठबंधन दलों के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करता है, जिसके द्वारा विधान सभा में बहुमत प्राप्त करने की संभावना होती है।
राज्यपाल को राज्य के विधानमंडल के सत्र को बुलाने और समाप्त करने का अधिकार होता है। वह राज्य के मंत्रिपरिषद की सलाह पर राज्य विधान सभा को भंग कर सकता है। अनुच्छेद 175 के अनुसार वह राज्य विधान सभा के सत्र को और जिस राज्य में दो सदन हैं, वहां दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित कर सकता है। यदि राज्य में विधान परिषद है, तो राज्यपाल विधान परिषद् की कुल सदस्य संख्या के लगभग 1/6 भाग को नामनिर्देशित करता है। ये ऐसे लोग होते हैं जिनको साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारी आन्दोलन या समाज सेवा का विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव हो।
राज्य के विधानमंडल के द्वारा पारित किसी भी बिल को कानून बनने के लिए राज्यपाल की सहमति जरूरी होती है।
इस संदर्भ में, राज्यपाल के पास ये अधिकार होते हैं:
भारत में 8 केंद्र शासित प्रदेश (UT’s) हैं: दिल्ली, अंडमान और निकोबार, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, लक्षद्वीप और पुडुचेरी। इनमें से पुडुचेरी, जम्मू और कश्मीर और दिल्ली इस संबंध में अपवाद हैं क्योंकि यहां आंशिक राज्य की स्थिति के कारण एक निर्वाचित विधायिका और सरकार है, जो उन्हें विशेष संवैधानिक संशोधन के तहत प्रदान की गई थी। पुडुचेरी और दिल्ली की अपनी विधानसभा, मंत्रिमंडल और मुख्यमंत्री है और इन दोनों प्रदेशों में उपराज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के तालमेल से ही यहां सरकार चलती है।
केंद्र शासित प्रदेश (UTs) संघीय क्षेत्र हैं और भारत की केंद्र सरकार द्वारा प्रशासित हैं। कुछ विशेष परिस्थितियों में भौगोलिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और जनकल्याण को देखते हुए केंद्र शासित प्रदेश का गठन किया जाता है। केंद्र शासित प्रदेश की अवधारणा को पहली बार राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 में पेश किया गया था। यह उन क्षेत्रों को संदर्भित करता है जो स्वतंत्र होने के लिए बहुत छोटे हैं या आसपास के राज्यों के साथ विलय करने के लिए बहुत अलग (आर्थिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक रूप से) हैं या आर्थिक रूप से कमजोर हैं या राजनीतिक रूप से अस्थिर हैं।
पुदुचेरी - 1954 में, पुडुचेरी को फ्रांसीसी शासन से स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद भारत गणराज्य में विलय कर दिया गया और पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश बन गया। 1963 में पुडुचेरी को आंशिक राज्य का दर्जा दिया गया।
गोवा - 1961 में, पुर्तगाली शासन से स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद, दमन और दीव और गोवा को भारत गणराज्य में मिला दिया गया था। 1987 में, गोवा को राज्य का दर्जा दिया गया और ऐसा दर्जा पाने वाला वह पहला केंद्र शासित प्रदेश बन गया।
दादरा और नगर हवेली - 2020 में दादरा और नगर हवेली, और दमन-दीव को एकल केंद्र शासित प्रदेश के तौर पर मिला दिया गया।
दिल्ली - दिल्ली पहले एक राज्य था। 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम के बाद, दिल्ली ने अपना राज्य का दर्जा खो दिया और एक केंद्र शासित प्रदेश बन गया। साल 1956 से 1991 तक दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश रहा। संविधान में 69वें संशोधन के साथ ही 1991 में दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का दर्जा मिला। तभी से यहां पर विधानसभा और मंत्रिमंडल अस्तित्व में है।
जम्मू और कश्मीर - 2019 में, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया था और इसने जम्मू और कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों - जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया।