
नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यूसी ध्यानी को गंगा सफाई पर नजर रखने के लिए बनी तीन सदस्यीय समिति का प्रमुख नियुक्त किया है। इससे पहले एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस एके गोयल ने समिति के प्रमुख रूप से में जस्टिस अरुण टंडन की नियुक्त किया था। समिति का गठन इसी साल छह अगस्त को किया गया था।
जस्टिस टंडन के प्रयागराज में कुंभ मेला आयोजन में व्यस्त होने के कारण उनके स्थान पर जस्टिस ध्यानी की नियुक्ति की गई है। समिति के सदस्यों की नियुक्ति केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और आइआइटी, रुड़की ने की है। इस समिति की बैठक एक से तीन दिसंबर तक प्रस्तावित है। एनजीटी ने ताजा आदेश जारी कर होटल, धर्मशाला और आश्रमों से पैदा कूड़े के ट्रीटमेंट का प्लांट नजदीक ही लगाने के लिए कहा है।
इस व्यवस्था के बगैर होटल, धर्मशाला और आश्रम नहीं चलाए जा सकेंगे। व्यवस्था पर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नजर रखेगा। इसी प्रकार से गंगा और अन्य पवित्र नदियों के स्नान वाले प्रमुख घाटों पर डिजिटल बोर्ड लगाने के भी एनजीटी ने निर्देश दिए हैं। इन बोर्ड पर पानी की गुणवत्ता के बारे में जानकारी दी जाएगी। पीठ ने कहा, समिति से जागरूकता अभियान चलाने के लिए आवश्यक व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया है।
नदियों के हालात पर सुनवाई कर रही पीठ में जस्टिस एसपी वांगदी भी शामिल हैं। पीठ ने सिनेमा हॉल और वीडियो पार्लर के लिए दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का कड़ाई से पालन कराने का भी कानून व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों को निर्देश दिया है। इस आदेश के तहत पर्यावरण से संबंधित जानकारी हर शो के शुरू या मध्य में दिए जाने के लिए कहा गया है।