
देहरादून। देश की आजादी के 70 साल बाद भी उत्तराखंड के एक गांव में बिजली नहीं पहुंची है। अंदाजा लगा सकते हैं कि वहां के विकास की क्या हालत होगी। मगर, यदि आपसे कहा जाए कि इसके बावजूद वहां के बच्चे टेक्नोलॉजी में रुचि ले रहे हैं। उन्हें इंटरनेट की अच्छी जानकारी है और पूरा गांव वाई-फाई से लैस है, तो क्या आपको यकीन होगा।
शायद नहीं, लेकिन यह सच्चाई है। बिजली से पहले इस गांव में वाई-फाई पहुंच चुका है और स्कूलों में इंटरनेट के जरिये हाई टेक एजुकेशन दी जा रही है। गढ़वाल की पहाड़ियों में बसे गेस गांव में आज भी बिजली नहीं पहुंची है। मगर, गांव वालों ने विकास की दौड़ में आगे रहने का रास्ता निकाल लिया है। मोबाइल नेटवर्क के लिए लोगों को किसी तरह की दक्कत नहीं होती। गांव के स्कूल में सोलर ऊर्जा से बिजली की व्यवस्था कराई जा रही है।
इंटरनेट और वाईफाई भी सोलर एनर्जी से चलाया जाता है। सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (ITDA) ने गांव को लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव किया है। जनवरी में एक सरकारी संस्था ने इस गांव को गोद लिया था। उदाहरण के लिए इस गांव के स्कूल में इकोनॉमिक्स, पॉलिटिकल साइंस, इंग्लिश और ज्योग्राफी पढ़ाने के लिए कोई टीचर नहीं था।
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लिहाजा, स्कूल के नए बने बने भवन में सफेद दीवार पर प्रोजेक्टर की मदद से उन्हे लेक्टर दिया जा रहा है। इस वाईफाई इंटरनेट की स्पीड 20Mbps की है। उत्तराखंड के जिस आखिरी गांव में बिजली पहुंची है, उससे यह गांव करीब 30 किमी दूरी पर स्थित है।
अधिकारियों ने बताया कि मार्च के दूसरे हफ्ते तक स्थानीय सरकारी स्कूल को कंप्यूटर और प्रोजेक्टर मुहैया कराया गया था। इसके बाद पूरे गांव को ऑन-लाइन कर दिया गया था। कॉलेज के 200 मीटर के दायरे में आने वाला कोई भी व्यक्ति फ्री वाई-फाई का लाभ उठा सकता है।