नई दिल्ली। हिन्दी को अदालती कार्यवाही की आधिकारिक भाषा बनाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस सिलसिले में एक जनहित याचिका दायर कर संविधान के अनुच्छेद 348 में संशोधन की मांग की गई है।

यह अनुच्छेद कहता है कि सुप्रीम कोर्ट और सभी उच्च न्यायालयों की कार्यवाही अंग्र्रेजी भाषा में होगी। यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील शिव सागर तिवारी ने दाखिल की है।

न्यायमूर्ति एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने तिवारी की दलीलें सुनने के बाद मामले में विचार का मन बनाते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। याचिका में अदालती कार्यवाही और फैसले हिन्दी में होने की मांग करते हुए कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 19 में लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी दी गई है।

इसी तरह अनुच्छेद 343 कहता है कि केंद्र की आधिकारिक भाषा हिंदी और देवनागरी लिपि होगी। लेकिन, अनुच्छेद 348 इसकी मुखालफत करता है। अब समय आ गया है कि सुप्रीम कोर्ट की भाषा राष्ट्रभाषा होनी चाहिए जैसा कि अनुच्छेद 343 में कहा गया है।

संविधान को लागू हुए 67 वर्ष हो चुके हैं। अब अनुच्छेद 348 में संशोधन कर अंग्रेजी की जगह हिन्दी शब्द जोड़ा जाना चाहिए।

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