नई दिल्‍ली। उधमपुर में जिंदा पकड़ा गया आतंकी मोहम्‍मद नावेद याकूब अब पाकिस्‍तान जाकर लश्‍कर के उन सभी आतंकियों को जान से मारना चाहता है, जिन्‍होंने उसे फिदायिन हमले के लिए भेजा था। उधमपुर में पांच अगस्‍त को किए गए फिदायिन आतंकी हमले के दौरान उसे दो भारतीय गांव वालों ने पकड़ लिया था। तब उसने कहा था कि उसे हिंदुओं को मारने में मजा आता है।

लश्‍कर के आतंकी से पूछताछ के बाद पता चला है कि उसे उधमपुर के नरसू नाल्‍लाह क्षेत्र में बीएसएफ के काफिले पर हमला करने से पहले नशीली दवा दी गई थी। पूछताछ में पता चला कि एक बार फिर एक जिंदगी गलत मोड़ पर पहुंच गई। वह आतंकी संगठनों का चारा बन गया।

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नावेद को एक बार जुआ खेलने के लिए घर से पैसे चोरी करते हुए पकड़ा गया था। उसने बताया कि उसकी जिंदगी में कोई लक्ष्‍य नहीं था और फैसलाबाद की एक मजिस्‍द में लश्‍कर के मौलवी बशीर ने उसे देखा था। बशीर बाद में उसका मेंटर बन गया और उसने नावेद के दिमाग में जीवन का उद्देश्‍य भरकर उसे जिहादी बना दिया। नावेद को पाकिस्‍तान के पंजाब में ट्रेनिंग दी गई।

लश्‍कर ने उसे भारत में खासतौर पर कश्‍मीर में मुस्लिम भाइयों पर होने वाले अत्‍याचार के वीडियो दिखाए। इसके बाद नावेद को तीन तरह का प्रशिक्षण दिया गया। पहला फिजिकल फिटनेस, दूसरा हथियारों को चलाने और तीसरा आत्‍मघाती हमला करने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद उसे लश्‍कर ने दो जून को भारत में भेज दिया।

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नावेद ने एक और साथी नॉर्मन के साथ पांच अगस्‍त को बीएसएफ के काफिले पर हमला करते हुए दो जवानों की जान ले ली और 11 अन्‍य को घायल कर दिया। जांचकर्ताओं ने बताया कि नावेद ने पांचवीं के बाद स्‍कूल छोड़ दिया था और इसके बाद उसने अधिकांश समय जुआ खेलने में और कभी-कभार स्‍थानीय पूल टेबल पर बिलियर्ड खेलने में बिताया।

नावेद ने बताया क‍ि उसे भारत आने से पहले लश्‍कर की ओर से 50 हजार रुपए दिए गए थे। इसमें से घाटी में लश्‍कर के आतंकी अबु कासिम ने सारा पैसा अपने पास रख लिया था और महज दो हजार रुपए ही नावेद को राेजमर्रा के खर्च के लिए दिए गए थे।

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