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हर 10 में से एक छात्र छोड़ रहा स्कूल, एमपी-छत्तीसगढ़ की स्थिति चिंताजनक, नीति आयोग की रिपोर्ट में खुलासा

रिपोर्ट के अनुसार, माध्यमिक स्तर (Secondary Level) पर स्कूल छोड़ने की दर (Drop-out Rate) शिक्षा के सभी चरणों में सबसे अधिक बनी हुई है।

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 09 May 2026 06:52:22 PM (IST)Updated Date: Sat, 09 May 2026 06:52:22 PM (IST)
हर 10 में से एक छात्र छोड़ रहा स्कूल, एमपी-छत्तीसगढ़ की स्थिति चिंताजनक, नीति आयोग की रिपोर्ट में खुलासा
शिक्षा प्रणाली पर नीति आयोग का खुलासा। (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. शिक्षा प्रणाली पर नीति आयोग का खुलासा
  2. 11.5% पर पहुंची राष्ट्रीय ड्रॉप आउट दर
  3. गुजरात और एमपी की स्थिति चिंताजनक

डिजिटल डेस्क। भारत में स्कूली शिक्षा को लेकर नीति आयोग की मई 2026 की नवीनतम रिपोर्ट ने एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, माध्यमिक स्तर (Secondary Level) पर स्कूल छोड़ने की दर (Drop-out Rate) शिक्षा के सभी चरणों में सबसे अधिक बनी हुई है। देश में व्यापक शैक्षिक सुधारों के बावजूद, माध्यमिक स्तर पर पहुंचने के बाद हर दस में से एक छात्र अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ रहा है।

सुधार की धीमी चाल

रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉप-आउट दर में क्रमिक सुधार हुआ है, लेकिन यह प्रगति राज्यों के बीच समान नहीं रही है। राष्ट्रीय औसत जो कभी काफी ऊंचे स्तर पर था, वह शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में घटकर 11.5 प्रतिशत रह गया है।


नीति आयोग ने चेतावनी दी है कि इस दर का ऊंचे स्तर पर बने रहना माध्यमिक शिक्षा तंत्र की बुनियादी कमजोरी को उजागर करता है। इसके पीछे आर्थिक दबाव, बाल श्रम (कम उम्र में काम पर लगना) और संस्थागत सहयोग का अभाव जैसे प्रमुख कारण जिम्मेदार पाए गए हैं।

राज्यों का रिपोर्ट कार्ड

अध्ययन में राज्यों के बीच भारी अंतर देखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, जहां कुछ छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने असाधारण प्रदर्शन किया है, वहीं कई बड़े राज्यों में स्थिति अब भी गंभीर है।

बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्य/UT

  • चंडीगढ़: 2% (सबसे कम दर)
  • झारखंड: 3.5%
  • लक्षद्वीप: 4.1%
  • उत्तराखंड: 4.6%
  • केरल: 4.8%

चिंताजनक स्थिति वाले राज्य

शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी माने जाने वाले गुजरात (16.9%) में ड्रॉप-आउट दर सबसे अधिक पाई गई है। इसके बाद मध्य प्रदेश (16.8%) और लद्दाख (16.2%) का नंबर आता है। अन्य राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश (15.5%), छत्तीसगढ़ (15.3%) और ओडिशा (15.0%) में भी आंकड़े राष्ट्रीय औसत से ऊपर हैं।

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ओडिशा और झारखंड ने पेश की मिसाल

रिपोर्ट का सबसे सकारात्मक पहलू उन राज्यों की प्रगति है, जिन्होंने एक दशक में अपनी स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। नीति आयोग ने विशेष रूप से ओडिशा, झारखंड और बिहार के मॉडल की सराहना की है।

राज्य पहले की ड्रॉप-आउट दर वर्तमान दर (2024-25)
ओडिशा 49.5% 15%
झारखंड 23.2% 3.5%
नागालैंड 35.1% 12.1%
बिहार 25.3% 6.9%
राजस्थान 18.8% 7.7%

सुधार की राह अभी लंबी है

नीति आयोग ने स्पष्ट किया है कि 'स्कूल छोड़ने की दर' कम होना इस बात का प्रमाण है कि छात्र शिक्षा तंत्र में बने हुए हैं। हालांकि, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों में हुई भारी कमी यह दर्शाती है कि सही सरकारी हस्तक्षेप और योजनाओं से बदलाव संभव है। फिर भी, रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि माध्यमिक स्तर पर छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने और उन्हें उच्च शिक्षा तक ले जाने के लिए अभी भी बड़े नीतिगत बदलावों की आवश्यकता है।