
डिजिटल डेस्क, नईदुनिया। देश में इन दिनों नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों को लेकर चर्चा तेज है। इसी बीच एक सवाल सामने आया है कि क्या भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का पक्का प्रमाण होता है या यह सिर्फ विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है।
इस मुद्दे पर साल 2010 में अलग-अलग मंत्रालयों के बीच चर्चा हुई थी। उस दौरान यह विचार किया गया था कि सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) का लाभ कौन-कौन उठा सकता है।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, विदेश मंत्रालय (MEA) और गृह मंत्रालय (MHA) के बीच RTI एक्ट के तहत नागरिक की परिभाषा को लेकर बातचीत हुई थी।
चर्चा में यह बात सामने आई कि विदेशों में रहने वाले भारतीय पासपोर्ट धारकों को RTI के तहत जानकारी मांगने के लिए नागरिक माना जा सकता है। यानी विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिक या NRI इस अधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं।
मंत्रालयों की बातचीत में विदेश में रहने वाले भारतीय पासपोर्ट धारकों को भारतीय मूल के लोगों (PIOs) और भारत के विदेशी नागरिकों (OCIs) से अलग माना गया।
रिकॉर्ड के मुताबिक, OCI और PIO श्रेणी के लोगों को RTI एक्ट के तहत आवेदन करने का अधिकार नहीं माना गया। सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि नागरिक शब्द की परिभाषा में केवल भारतीय नागरिक शामिल होंगे।
RTI आवेदक की नागरिकता के मुद्दे पर सरकार ने तब विचार किया, जब अमेरिका में रहने वाले एक NRI ने इस संबंध में आवेदन किया था।
उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर विदेशों में रहने वाले भारतीयों की वोट देने और भारत के शासन में अपनी भागीदारी की इच्छा को मान्यता देने की मांग की थी। इसके बाद विभिन्न सरकारी विभागों के बीच RTI एक्ट में नागरिक की परिभाषा को लेकर बातचीत हुई।
दस्तावेजों से यह भी सामने आया कि कुछ RTI आवेदकों ने सूचना का अधिकार कानून के तहत आवेदन करने के उद्देश्य से OCI (Overseas Citizen of India) को भारतीय नागरिक की परिभाषा में शामिल करने की कोशिश की थी।
हालांकि विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की राय थी कि केवल भारतीय पासपोर्ट रखने वाले और विदेश में रहने या काम करने वाले लोग यानी NRI ही RTI एक्ट के तहत जानकारी मांग सकते हैं।
विदेशों में रहने वाले कुछ भारतीय RTI कार्यकर्ताओं को आवेदन करने में परेशानी आने के बाद उन्होंने सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन (CIC) का रुख किया।
इसके बाद CIC ने प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। सुनवाई के दौरान विदेश मंत्रालय ने कहा कि उनके अनुसार नागरिक शब्द में भारतीय पासपोर्ट रखने वाले विदेश में रहने वाले लोग शामिल हैं। MEA ने स्पष्ट किया कि OCI और PIO इस श्रेणी में शामिल नहीं हैं। वहीं OCI और PIO से जुड़े मामलों में गृह मंत्रालय नोडल मंत्रालय होने के कारण उसकी राय भी जरूरी मानी गई।