नई दिल्ली। भारत में विकसित देश की पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन "वंदे भारत एक्सप्रेस" का तोहफा मिल गया है।शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर इस ट्रेन को रवाना किया। रात लगभग दस बजे ट्रेन ने वाराणसी में पहुंचकर अपना पहला सफर पूरा किया। इस मौके पर रेलमंत्री पीयूष गोयल के अलावा रेलवे बोर्ड के सदस्य व अधिकारी तथा मीडियाकर्मी मौजूद थे। संचार एवं रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि वंदे भारत का दूसरा ट्रेन सेट मार्च में बनकर तैयार हो जाएगा।

इससे पहले प्रधानमंत्री ने यहां दो मिनट का मौन रखते हुए पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम ने कहा कि आतंकियों ने यह हमला करके बहुत बड़ी गलती कर दी है।

इसके बाद पीएम ने ट्रेन के अंदर जाकर इसका मुआयना भी किया। इस दौरान उनके साथ रेल मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद रहे।

वाराणसी तक की उद्घाटन यात्रा में आम यात्री शामिल नहीं होंगे। यात्रियों के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस (शुरुआती नाम ट्रेन-18) का नियमित संचालन 17 फरवरी से होगा। इसका समय भी उद्घाटन यात्रा से अलग होगा। नियमित संचालन में नई दिल्ली से ट्रेन का प्रस्थान समय सुबह छह बजे है और यह अपराह्न दो बजे वाराणसी पहुंचाएगी।

कानपुर और इलाहाबाद में कार्यक्रम

"वंदे भारत एक्सप्रेस" शुक्रवार सुबह लगभग 11 बजे नई दिल्ली स्टेशन से रवाना हुई और रात करीब साढ़े नौ बजे वाराणसी पहुंचेगी। इस बीच कानपुर और इलाहाबाद में इसे विशेष कार्यक्रमों के लिए 40-40 मिनट रोका जाएगा। वंदे भारत एक्सप्रेस परीक्षण संचालनों में 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार पकड़ने में कामयाब रही है।

लेकिन नई दिल्ली-वाराणसी ट्रैक की स्थिति को देखते हुए नियमित संचालन में इसे बीच-बीच में अधिकतम 160 किलोमीटर पर चलाया जाएगा। कानपुर और इलाहाबाद में दो-दो मिनट के ठहराव को शामिल करने पर इसकी औसत गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा के करीब होगी। अभी देश में सबसे तेज चलने वाली ट्रेन गतिमान एक्सप्रेस है जो अधिकतम 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ती है। राजधानी और शताब्दी ट्रेनों को 130 किलोमीटर की उच्चतम स्पीड पर चलाया जाता है।

16 कोच की है ट्रेन,1128 यात्री करेंगे सफर

वंदे भारत एक्सप्रेस में 16 एसी कोच हैं। इनमें दो एक्जीक्यूटिव क्लास, जबकि 14 चेयरकार के हैं। कोच की लंबाई अधिक होने के कारण ट्रेन में कुल 1128 यात्री सफर कर सकेंगे। यह संख्या इतने ही कोच वाली शताब्दी ट्रेन के मुकाबले अधिक है। वंदे भारत में अधिक सीटों का इंतजाम समस्त इलेक्ट्रिक उपकरणों को कोच के नीचे स्थानांतरित किए जाने से संभव हुआ है। स्वचालित होने के कारण यह बिलकुल मेट्रो जैसी दिखती है और इसके दरवाजे भी मेट्रो की तरह ऑटोमेटिक हैं। चढ़ने-उतरने के लिए दरवाजों के साथ ऑटोमेटिक पायदान भी दिए गए हैं।

ट्रेन की अन्य सुविधाओं में जीपीएस आधारित ऑडियो विजुअल पैसेंजर इंफारमेशन सिस्टम, ऑनबोर्ड हॉटस्पॉट वाई-फाई, बायोवैक्यूम टायलेट, डूअल मोड लाइटिंग तथा सभी सीटों में मोबाइल चार्जिंग सॉकेट शामिल हैं। एक्जीक्यूटिव क्लास की सीटें पुशबैक होने के साथ चारों ओर घूम भी सकती हैं। चेयरकार की सीटों में भी हल्के पुशबैक की व्यवस्था है।

शताब्दी की भांति प्रत्येक कोच में खाना गर्म रखने के लिए छोटी पेंट्री दी गई है। बाहरी शोर से बचाने के लिए ट्रेन को काफी हद तक साउंड प्रूफ बनाया गया है। इस ट्रेन की एक अन्य खास बात इसकी रीजनरेटिव ब्रेकिंग प्रणाली है, जिससे 30 प्रतिशत बिजली की बचत होती है। इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में निर्मित इस ट्रेन के ऐसे ही सौ और सेट तैयार करने की योजना है।

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