दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पूरी तरह बैन, नियम तोड़ने पर होगी सख्त सजा, जमानत मिलना भी मुश्किल
देश की राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र रहे 'जंतर-मंतर' पर अब किसी भी तरह के धरने-प्रदर्शन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 06:56:36 PM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 06:56:36 PM (IST)
HighLights
- सरकार ने जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट करने पर रोक लगा दी है।
- दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
- गिरफ्तारी की स्थिति में जमानत मिलना भी बेहद मुश्किल हो जाएगा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र रहे 'जंतर-मंतर' पर अब किसी भी तरह के धरने-प्रदर्शन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। पहले यहां प्रदर्शन के लिए नई दिल्ली जिले के डिप्टी पुलिस कमिश्नर (DCP) से एडवांस में लिखित एनओसी (NOC) लेनी पड़ती थी, लेकिन अब यह स्थल प्रदर्शनों के लिए प्रतिबंधित है। सरकार ने जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट करने पर रोक लगा दी है।
पाबंदी के बाद यदि कोई दल या समूह यहां इकट्ठा होता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। गिरफ्तारी की स्थिति में जमानत मिलना भी बेहद मुश्किल हो जाएगा।
प्रतिबंध के बावजूद CJP नेताओं की घुसपैठ और गिरफ्तारी
जंतर-मंतर पर रोक लगने के बावजूद मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने गेट फांदकर अंदर घुसने की कोशिश की। दिल्ली पुलिस ने बिना अनुमति प्रवेश करने के आरोप में दोनों को तुरंत हिरासत में ले लिया। फिलहाल, दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
अब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पर क्या हैं सजा के प्रावधान?
- अब यहां किसी भी तरह का विरोध प्रदर्शन किया जाएगा, तो पुरानी CrPC की धारा 144 और अब BNSS की धारा 163 के उल्लंघन पर कार्रवाई होगी।
- भारतीय न्याय संहित की धारा 223 और पुराने कानून में IPC की धारा 188 के तहत सरकारी आदेश की अवहेलना के तहत भी मामला दर्ज हो सकता है। इसमें एक महीने से लेकर 6 महीने तक की जेल हो सकती है और जुर्माना लगाया जा सकता है या फिर दोनों हो सकते हैं।
- BNS की धारा 189 और पुरानी IPC की धारा 143 के तहत गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने पर छह महीने तक की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकता है।
- जंतर-मंतर पर अगर कोई प्रदर्शन करने की कोशिश करता है और प्रदर्शनकारी घातक हथियारों के साथ पाए जाते हैं, तो सजा 2 साल तक कैद में भी बदल सकती है।
- प्रदर्शन के दौरान पुलिस रोकने की कोशिश करती है और समूह उनसे उलझता है या बैरिकेड्स तोड़ता है तो BNS की धारा 221 और पुरानी IPC की धारा 186 के मुताबिक लोक सेवक के काम में बाधा डालने के अपराध में तीन महीने तक की जेल की सजा हो सकती है।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर हमला या बल प्रयोग किया जाता है तो यह गैर-जमानती अपराध बन जाता है। इसमें तीन से पांच साल तक की जेल हो सकती है।