
नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी के अंदर किताबों की फोटोकॉपी की बिक्री को रोकने के लिए तीन अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों ने डीयू की फोटोकॉपी शॉप के खिलाफ केस किया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले को खारिज कर दिया।
माना जा रहा है कि यह एक ऐतिहासिक फैसला है, जिसका भारत के कॉपीराइट कानूनों पर बड़ा व्यापक असर पडे़गा। जस्टिस राजीव सहाय ने फोटोकॉपी की दुकान पर तीन अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों की किताबों के चैप्टर्स की फोटोकॉपी पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया।
यूनिवर्सिटी प्रेस, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस और टेलर एंड फ्रांसिस की ओर से लगाई गई याचिका के बाद नवंबर 2012 में हाई कोर्ट ने रामेश्वरी फोटोकॉपी सर्विस पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह दुकान नॉर्थ कैंपस में दिल्ली स्कूल फॉर इकोनॉमिक्स के पास स्थित है।
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अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों ने आरोप लगाया था कि कियोस्क ने उनके कॉपीराइट का उल्लंघन किया है और दिल्ली विश्वविद्यालय के कहने पर उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है क्योंकि छात्रों ने अब उनकी किताबें खरीदनी बंद कर दी हैं।
लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय ने फोटोकॉपी करने वालों का समर्थन करते हुए कहा कि छात्रों द्वारा कॉपीराइट पुस्तकों की फोटोकॉपी का उपयोग करना तार्किक शैक्षिक आवश्यकता है और इसे उल्लंघन के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। इस मामले में छात्र भी कियोस्क के समर्थन में खडे़ दिखे क्योंकि कुछ किताबें काफी महंगी थी।
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विश्वविद्यालय ने तर्क दिया कि शैक्षिक उद्देश्य के लिए कॉपीराइट की किताबों की फोटोकॉपी कराने को उल्लंघन कहना गलत था। कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के तहत, शैक्षिक उद्देश्य सहित "उचित उपयोग" को उल्लंघन के दायरे से बाहर रखा गया है।