मुंबई। अलग सीट लेने पर 5 से 12 साल के बच्चों का भी पूरा किराया वसूलने का फैसला रेलवे के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। नियम बदलने के बाद 22 अप्रैल से अब तक मध्य और पश्चिमी रेलवेज ने कुल मिलाकर 20 करोड़ रुपए अतिरिक्त कमाई कर ली।

अनुमान है कि इस फैसले से हर साल उसे 525 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई भी हो जाएगी। रेलवे के एक वरीष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले 2 महीनों में मध्‍य रेलवे और पश्चिमी रेलवे से करीब 5.5 लाख बच्चों ने बिना कन्फर्म्ड बर्थ के यात्रा की।

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रेलवे के इस नए नियम से यात्रियों को भी लाभ हुआ है। इसका मतलब कि इतनी सीटें दूसरे पैसेंजरों को मिलीं यानी लाखों पैसेंजरों को कन्फर्म्ड बर्थ्स भी मिलने लगी हैं। पहले 5 से 12 साल के बच्चों को आधे किराए पर ही अलग से सीटें मिल जाती थीं।

साल 2014-15 में 5 से 12 साल की उम्र के 2.11 करोड़ बच्चों ने हाफ टिकट पर पूरी सीट लेकर यात्रा की थी। बच्चों के लिए हाफ रेट की सुविधा अब भी उपलब्ध है, लेकिन बिना सीट या बर्थ के। ऐसे में बच्चे के माता-पिता को अपनी सीट में ही बच्‍चों को ले जाना होता है।

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वहीं, पांच साल से नीचे का बच्चा अब भी बिना बर्थ के फ्री रेल यात्रा कर सकता है। रेलवे ने बिना कोई लागत के हर साल दो करोड़ अतिरिक्त बर्थ या सीट मुहैया कराने के मकसद से नया नियम लागू किया है।

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