
नई दिल्ली। ट्रेनों की सफाई के लिए आवश्यक पानी को बचाने के लिए उत्तरी रेलवे ने अनोखी पहल की है। दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर एक ऑटोमैटिक ट्रेन वाशिंग सिस्टम स्थापित किया गया है। भारतीय रेलवे ने ट्रेनों की सफाई के लिए आवश्यक पानी बचाने के लिए 10 प्रमुख डिपो में स्वचालित कोच वाशिंग प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया था।
एएनआई द्वारा एक ट्वीट के मुताबिक, वाशिंग सिस्टम में प्रति दिन 250 कोच को धोने की क्षमता है। यह 24 कोच रेक को धोने में 7-8 मिनट लगाता है। इससे पहले दी गई रिपोर्टों से पता चलता है कि 22-24 कोच की सफाई में करीब 12,000 लीटर से 14,000 लीटर पानी का उपयोग किया जाता है।
यदि प्रमुख स्टेशनों पर स्वचालित वाशिंग प्लांट स्थापित किए जाते हैं, तो यह पर्यावरण अनुकूल होगा। इस तरह से होने वाली कोच की धुलाई में कम मात्रा में पानी, साबुन और कीटाणुनाशकों का उपयोग होगा। इसके अलावा, धोने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पानी का ट्रीटमेंट ईटीपी प्लांट में करके उसका फिर से इस्तेमाल किया जा सकेगा।
बताया जा रहा है कि ऑटोमैटिक वॉशिंग प्लांट में रेक को साफ करने के लिए केवल 6000 लीटर पानी की आवश्यकता होगी। इसमें से 4000 लीटर पानी को रीसाइकिल किया जा सकेगा। एक गणना के अनुसार, एक डिपो में प्लांट चालू होने के बाद रोजाना एक लाख 24 हजार लीटर पानी और प्रति वर्ष 453 लाख लीटर पानी बचाया जा सकेगा।