
सुशील कुमार, मेरठ। बच्चों के अपहरण व हत्या मामले में मौत की सजा पाए सुरेंद्र कोली से कानून के बाद वक्त भी हिसाब- किताब चुकता कर रहा है। मौत कोली के दिन-ब-दिन करीब आ रही है, जबकि आखिरी वक्त में उसके अपने दूर भाग रहे हैं। जेल प्रशासन कोली के अंतिम संस्कार को लेकर फिक्रमंद है। मेरठ की जेल में बंद कोली से फिलहाल कोई भी मिलने नहीं आ रहा है।
2006 में देश भर में तहलका मचाने वाले निठारी कांड के अभियुक्त सुरेंद्र कोली को चार सितंबर की रात 8.10 बजे मेरठ के चौधरी चरण सिंह जिला कारागार लाया गया था। उसे मेरठ जेल में ही फांसी दी जानी है। जेल प्रशासन ने कोली से मिलने वालों की जांच-पड़ताल के लिए एक डिप्टी जेलर व दो बंदी रक्षकों की ड्यूटी लगाई, लेकिन बीते चार दिनों में कोई भी कोली से मिलने नहीं पहुंचा।
जेल प्रशासन ने कोली से पूछा भी कि दिल्ली में रह रही उसकी पत्नी शांति और ससुराल के लोग मिलने क्यों नहीं आ रहे? इस सवाल पर कोली चुप रहा। वरिष्ठ जेल अधीक्षक मोहम्मद हुसैन मुस्तफा रिजवी ने बताया कि फांसी से पहले सामजिक संस्थाओं से भी संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि यदि कोली के परिवार का कोई सदस्य उसका शव लेने नहीं आया तो अंतिम संस्कार खुद करना होगा।
पुलिस ढूंढ रही कोली के गांव का रास्ता
सुरेंद्र कोली के उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिला स्थित मुंगरूखाल गांव का रास्ता पुलिस तलाश रही है। माना जा रहा है कि फांसी के वक्त कोली की मां कुंती देवी को जेल में लाया जा सकता है। जेल प्रशासन चाहता है कि कोली के शव को उसके गांव भेजा जाए। इस बाबत उसके परिजनों से भी संपर्क साधने का प्रयास किया जा रहा है।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि चौथे दिन कोली की दिनचर्या में कुछ बदलाव आया है। उसने रात चार घंटे की नींद ली। सुबह नहाने से पहले बाल धोने के लिए शैंपू मांगा। उसके बाद पालक के साथ चार रोटी खाई। कोली को अब भी उम्मीद है कि उसकी सजा उम्रकैद में बदल जाएगी।