
डिजिटल डेस्क, नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित शताब्दी समापन समारोह कार्यक्रम नागपुर में जारी है। हर साल विजयादशमी पर होने वाला संघ का वार्षिक उत्सव संगठन के लिए बेहद खास होता है। इस बार 100वें वर्ष के ऐतिहासिक अवसर के चलते इस आयोजन को लेकर पूरे देश में अभूतपूर्व उत्सुकता और उत्साह देखा जा रहा है।

इस गरिमामय समारोह में दैनिक जागरण के प्रधान संपादक संजय गुप्त मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए हैं। उनके शामिल होने से इस शताब्दी समारोह का महत्व और बढ़ गया है।
At today’s #Vijayadashami Utsav in Nagpur, Chief Guest Sri Sanjay Gupta ji, Chief Editor of Dainik Jagran, and RSS Sarsanghchalak Dr. Mohan Bhagwat ji paid floral tributes at Smriti Mandir, the samadhi sthal of RSS founder Dr. Keshav Baliram Hedgewar and Sri Guruji Golwalkar ji. https://t.co/AsItIHEfzv
— RSS (@RSSorg) October 20, 2026
कार्यक्रम की शुरुआत से पहले स्मृति मंदिर में संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की प्रतिमा पर सरसंघचालक मोहन भागवत और प्रमुख अतिथि दैनिक जागरण के प्रधान संपादक संजय गुप्त ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। दोनों ने पुष्प अर्पित कर संस्थापक को नमन किया।
संघ प्रमुख मोहन भागवत और चीफ गेस्ट संजय गुप्त कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। उन्होंने शस्त्र पूजन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। शस्त्र पूजन के बाद आरएसएस का स्वागत प्रणाम किया गया। इसके बाद ध्वजारोहण प्रार्थना हुई।
ध्वजारोहण प्रार्थना के बाद पथ संचलन किया गया। पथ संचलन के बाद मिश्र व्यायाम योग जारी है। बैंड की मधुर ध्वनि पर स्वयंसेवकों द्वारा व्यायाम योग किया जा रहा है। नागपुर में चल रहे इस ऐतिहासिक कार्यक्रम पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।
दैनिक जागरण के प्रधान संपादक संजय गुप्त ने कहा कि संघ और दैनिक जागरण की नीति भारतीय सनातन संस्कृति, सद्भावना और राष्ट्र के प्रति समर्पण के बिंदु पर एक ही है। दोनों का लक्ष्य देशवासियों में यह भावना जगाना है कि वे देश के लिए क्या योगदान दे सकते हैं।
दैनिक जागरण के प्रधान संपादक संजय गुप्त ने कहा कि 101 वर्ष पूर्व संघ की स्थापना का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज को एकजुट कर सामर्थ्यवान बनाना और राष्ट्र को स्वतंत्रता दिलाना था। संघ की सोच स्पष्ट थी कि पराधीनता की मानसिकता से उबरे बिना वास्तविक स्वतंत्रता संभव नहीं है।
सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा तकनीक और एआई का उपयोग नैतिक अनुशासन के बिना हुआ, तो यह महाविनाश का कारण बन सकता है। भारत का प्राचीन सनातन विचार पूरे विश्व को परिवार मानता है और विकास का एक स्थायी, संतुलित व एकात्म मॉडल प्रस्तुत करता है। भारत की सनातन दृष्टि पूरी दुनिया को समन्वय, संयम और एकात्म विकास का एक नया प्रतिमान और मार्ग दे सकती है।

सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा, विभिन्न माध्यमों से प्राप्त जानकारी बिना उचित-अनुचित का विवेक किये नई पीढ़ी ग्रहण करती है। उसके दुष्परिणामों का अनुभव होने के बाद विभिन्न देशों ने कुछ अनुशासन और निर्बन्ध लागू किये हैं। हमारे अपने देश में भी इस प्रकार की आवश्यकता, विशेषत: ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को लेकर, समाज में अनुभव की जा रही है। शासन प्रशासन को इसका विचार करना चाहिये।
सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि भारत विकास की राह पर है, विकास पूरा नहीं हुआ है तो समस्या तो रहेंगीं ही। समस्या के चलते आंदोलन भी होते ही हैं और प्रजातंत्र में आंदोलन होंगे ही। लेकिन आंदोलन समाधान के लिए होना चाहिए। दोलनों का उद्देश्य हमेशा समाधान खोजना होना चाहिए। हमारी किसी भी कृति से समाज में अनबन, द्वेष या विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए।