
डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश के भोपाल में जागरण न्यू मीडिया की फैक्ट चेकिंग विंग विश्वास न्यूज के फैक्ट चेकर्स ने सच के साथी सीनियर्स कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों को वित्तीय धोखधड़ी, डिजिटल सेफ्टी, वोटर जागरूकता और डीपफेक से बचने के तरीके सिखाए। इसका आयोजन भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के एमपी नगर स्थित पुराने परिसर में हुआ।
डिप्टी एडिटर देविका मेहता ने सेमिनार में कहा कि आपके पास किसी भी तरह का मैसेज आए, तो उसका सोर्स का पता होना बहुत जरूरी है। ऐसा होने पर आप उस जानकारी की सच्चाई का पता लगा सकते हैं। जानकारी की सच्चाई पता चलने पर फर्जी व भ्रामक सूचनाओं की चेन टूट सकती है।
उन्होंने कहा कि आपके पास आ रही जानकारी विशेष एजेंडे के तहत भेजी जाती है। ऐसे में आपको जागरूक बनने की जरूरत है। देविका ने रोचक उदाहरण देकर वहां बैठे लोगों को सच, राय व अफवाह के बीच के अंतर को बेहतर तरीके समझाया।
देविका मेहता ने प्रतिभागियों को एआई टूल्स से बनने वाले डीपफेक वीडियो के बारे में बताया। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों को डीपफेक वीडियो से होने वाले नुकसान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आज कल इस तरह के वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें सेलिब्रिटी गेमिंग एप व बेटिंग एप का प्रचार करते दिख रहे हैं। इस तरह के वीडियो को पहचान कर जागरूक होने की जररत है। इनके वीडियो को देखकर चेहरे के हावभाव व लिप सिंक को ध्यान से देखना चाहिए। यह वीडियो की असलियत को सामने ला देगी।

चीफ सब एडिटर और फैक्ट चेकर प्रज्ञा शुक्ला ने लोगों को फैक्ट चेकिंग टूल्स के बारे में बताया। प्रज्ञा ने कहा कि आपको वित्तीय धोखाखड़ी से बचने के लिए सतर्क रहना होगा। किसी भी तरह लुभावने मैसेज के फिशिंग लिंक्स पर क्लिक ना करें। अपने अकाउंट का पासवर्ड और ओटीपी किसी को भी न बताएं। उन्होंने फैक्ट चेकिंग टूल्स की मदद से सूचनाओं की जांच करना भी सिखाया। अंत में उन्होंने सभी से जागरूक मतदाता बनने की अपील की।
इससे पहले हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और तेलंगाना में सेमिनार व वेबिनार के माध्यम से लोगों को फैक्ट चेकिंग का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। गूगल न्यूज इनिशिएटिव (जीएनआई) के सहयोग से संचालित हो रहे इस कार्यक्रम का अकादमिक भागीदार माइका (मुद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशंस, अहमदाबाद) है।
'सच के साथी सीनियर्स' भारत में तेजी से बढ़ रही फेक और भ्रामक सूचनाओं के मुद्दे को उठाने वाला मीडिया साक्षरता अभियान है। कार्यक्रम का उद्देश्य 15 राज्यों के 50 शहरों में सेमिनार और वेबिनार की श्रृंखला के माध्यम से स्रोतों का विश्लेषण करने, विश्वसनीय और अविश्वसनीय जानकारी के बीच अंतर करते हुए वरिष्ठ नागरिकों को तार्किक निर्णय लेने में मदद करना है। इसमें रजिस्ट्रेशन करने के लिए www.vishvasnews.com/sach-ke-sathi-seniors/ पर क्लिक करें।