
नई दिल्ली, ब्यूरो। लोकसभा चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद संघ परिवार हिंदुओं को एकजुट करने की कोशिशों में जुट गया है। संघ परिवार की कोशिश 15 फीसदी दलितों को मुख्यधारा से जोड़ने की है। भाजपा प्रवक्ता डा. विजय सोनकर शास्त्री की तीन किताबों के विमोचन के दौरान संघ और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने दलितों को हिंदू समाज की मार्शल कौम (लड़ाकू जातियां) करार दिया, जिनकी स्थिति एक हजार साल तक विदेशी शासकों की यातनाओं के कारण बदतर हो गई थी। इन पुस्तकों का विमोचन करते हुए सरसंघचालक मोहन भागवत ने जोर देकर कहा कि दलितों को समाज में सम्मानजनक स्थान देना ही होगा।
विजय सोनकर शास्त्री ने खटीक, वाल्मीकि और चर्मकार जातियों की उत्पत्ति और समाज में उनकी मौजूदा स्थिति के ऐतिहासिक कारणों का विश्लेषण किया है। उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की है कि ये तीनों जातियां दरअसल ऐसे क्षत्रिय और ब्राह्मणों से बनी हैं, जिन्होंने विदेशी आक्रांताओं के सामने झुकने से इन्कार कर दिया था। इसी कारण इन्हें समाज में सबसे बदतर काम करने की सजा दी गई। मोहन भागवत ने इसका समर्थन करते हुए कहा कि समाज में उच्च स्थान पाना दलित जातियों का हक है और उच्च जातियां ऐसा करती हैं तो कोई अहसान नहीं करेंगी। दलितों के आरक्षण का समर्थन करते हुए उन्होंने उच्च जातियों को इसका विरोध नहीं करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि दलितों ने एक हजार साल तक कष्ट सहा है। उनकी स्थिति ठीक करने के लिए हमें 100 साल तक मुश्किल झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।
मोहन भागवत के साथ-साथ इस मौके पर मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी, सूचना व प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर व विश्व हिन्दू परिषद के वरिष्ठ नेता अशोक सिंघल भी मौजूद थे। इन सभी नेताओं ने दलितों की मौजूदा स्थिति को विदेशी आक्रमणकारियों की देन बताया और पूरे हिन्दू समाज को एकजुट करने के लिए उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान देने की जरूरत पर बल दिया।