कोलकाता, ब्‍यूरो। सैकड़ों करोड़ के बहुचर्चित सारधा चिटफंड घोटाले में सीबीआई ने बंगाल के पूर्व डीजीपी व अवकाश प्राप्त आइपीएस अफसर और तृणमूल नेता रजत मजूमदार को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के कुछ देर बाद ही मजूमदार ने सीने में दर्द की शिकायत करते हुए कहा कि उन्हें बोलने में कठिनाई हो रही है। इसके बाद उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बुधवार को उन्हें अलीपुर अदालत में पेश किया जाएगा। जहां सीबीआई अधिकारी उन्हें अपनी हिरासत में लेने की मांग करेंगे।

सारधा प्रमुख सुदीप्त सेन व तृणमूल कांग्र्रेस से निलंबित सांसद कुणाल घोष ने रजत मजूमदार पर धोखाधड़ी में शामिल होने का आरोप लगाया था। सुदीप्त सेन ने कहा था कि रजत मजूमदार उससे प्रति महीने 10 लाख रुपये लेते थे, साथ ही समय-समय पर मोटी रकम वसूलते थे। अमेरिका के लास वेगास में बंग सम्मेलन के लिए रजत ने सुदीप्त से चार करोड़ रुपये लिए थे, लेकिन उसका भी हिसाब नहीं दिया।

इस आरोप के आधार पर सीबीआई ने अवकाश प्राप्त आइपीएस अधिकारी मजूमदार से 23 अगस्त में करीब सात घंटे पूछताछ की थी। 14 अगस्त को उनके घर की तलाशी ली गई। इस तलाशी में उनके घर से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले थे। इन्हीं तथ्यों की पुष्टि के लिए उनसे एक बार और पूछताछ की गई और फिर मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया। बताते हैं कि पूछताछ में रजत मजूमदार ने कई सवालों का गोलमोल उत्तर दिया। सुदीप्त सेन से पूछताछ में पता चला है कि मजूमदार सारधा कंपनी के लिए सलाहकार के तौर पर काम करते थे।

उधर मंगलवार को तृणमूल कांग्र्रेस नेता के पूर्व करीबी आसिफ खान और कुणाल से फिर से पूछताछ की गई। वहीं तृणमूल कांग्र्रेस के राज्यसभा सांसद अहमद हसन इमरान से भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने पूछताछ की। इस घोटाले का खुलासा गत वर्ष हुआ था। करीब एक वर्ष तक चली इस जांच प्रक्रिया में सीरियस फ्राड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआइओ) ने केंद्र सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय को अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट सौंप दी है।

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