सीरियल किलर राजा कोलंदर: भय और कानून के बीच फंसी इंसानी खोपड़ी का सूप पीने वाले की डरावनी कहानी
उत्तर भारत के एक शांत से दिखने वाले इलाके में एक ऐसा व्यक्ति रहता था जो खुद को राजा कहलवाना पसंद करता था। उसका असली नाम राम निरंजन था, लेकिन लोग उसे र ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 04 Jan 2026 04:31:22 PM (IST)Updated Date: Sun, 04 Jan 2026 04:31:22 PM (IST)
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- खुद को राजा कहलवाना पसंद करता था
- लोग उसे राजा कोलंदर के नाम से जानते थे
- पुलिस से लेकर अदालत तक सभी को उलझाए रखा
मनोज दुबे। उत्तर भारत के एक शांत से दिखने वाले इलाके में एक ऐसा व्यक्ति रहता था जो खुद को राजा कहलवाना पसंद करता था। उसका असली नाम राम निरंजन था, लेकिन लोग उसे राजा कोलंदर के नाम से जानते थे। बाहर से साधारण दिखने वाला यह आदमी भीतर से एक गहरे अंधेरे संसार में जी रहा था। ऐसा संसार, जिसने पुलिस से लेकर अदालत तक सभी को वर्षों तक उलझाए रखा।
राजा कोलंदर अपने लिए अलग ही नियम बनाता था। वह खुद को न्यायाधीश भी समझता था और जल्लाद भी। यही भ्रम उसे धीरे-धीरे अपराध की उस राह पर ले गया, जहां से लौटना संभव नहीं था।
जनवरी 2000: दो युवक और एक रहस्यमय गुमशुदगी
साल 2000 की एक ठंडी जनवरी की सुबह, मनोज कुमार सिंह और रवि श्रीवास्तव लखनऊ से अपनी कार में निकले। दोनों को किसी ने नहीं बताया था कि यह उनकी आखिरी यात्रा होगी। रायबरेली के हरचंदपुर इलाके में उनकी मौजूदगी आखिरी बार दर्ज हुई। इसके बाद सन्नाटा। फोन बंद, कोई खबर नहीं, कोई सुराग नहीं। परिवारों की बेचैनी बढ़ती गई, लेकिन जवाब कहीं नहीं मिले। मामला फाइलों में दबता चला गया।
एक हत्या, जिसने परदा हटाया
कुछ समय बाद, एक पत्रकार धीरेंद्र सिंह की हत्या ने पूरे मामले को फिर से जिंदा कर दिया। जांच आगे बढ़ी, और धीरे-धीरे एक नाम उभरने लगा...राजा कोलंदर। पूछताछ, गवाहियां और पहचान परेड के बाद, पुलिस के सामने वह तस्वीर साफ होने लगी जो वर्षों से धुंधली थी।
अदालत की कार्यवाही: सच के टुकड़े
अदालत में बारह गवाह पेश हुए। शिव शंकर सिंह ने उस आख़िरी दिन की कहानी सुनाई, जब पीड़ितों को राजा कोलंदर, उसकी पत्नी फूलन देवी और अन्य लोगों के साथ देखा गया था। एक अन्य गवाह, अमर नाथ सिंह, ने अदालत को बताया कि आरोपियों को घटना वाले दिन देखा गया था और पूछताछ के दौरान उन्होंने अपना अपराध स्वीकार किया था। धीरे-धीरे, सबूत एक-दूसरे से जुड़ते चले गए।
अदालत का फैसला
अदालत ने माना कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित अपराध था। अपहरण, लूट और हत्या की साजिश। राम निरंजन उर्फ राजा कोलंदर और उसके साथी बछराज कोल को दोषी ठहराया गया। दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और 2.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। जुर्माने का बड़ा हिस्सा पीड़ित परिवारों को देने का आदेश हुआ।
अंत नहीं, एक चेतावनी
यह कहानी सिर्फ एक अपराधी की नहीं है, बल्कि उस मानसिक अंधेरे की भी है, जो इंसान को खुद को भगवान समझने की भूल तक पहुंचा देता है। राजा कोलंदर की कहानी कानून की जीत पर खत्म होती है, लेकिन यह समाज के लिए एक चेतावनी छोड़ जाती है कि असली भय अक्सर सबसे साधारण चेहरे के पीछे छिपा होता है।