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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 17, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Shashi Tharoor Controversy: पाकिस्तान को बेनकाब करने वाले डेलिगेशन में शशि थरूर के होने पर विवाद… ऐसा क्या हुआ कि कांग्रेस को लग गई मिर्ची

Shashi Tharoor Controversy: कांग्रेस के नेतृत्व और शशि थरूर के बीच संबंधों की खटास शनिवार को खुलकर सामने आ गई। कांग्रेस नहीं चाहती थी कि थरूर केंद्र सरकार के डेलिगेशन का हिस्सा बनाकर विदेश जाएं, जबकि सरकार ने कांग्रेस से सिर्फ थरूर को ही मौका दिया।

By Arvind DubeyEdited By: Arvind Dubey
Publish Date: Sat, 17 May 2025 01:53:58 PM (IST)Updated Date: Sat, 17 May 2025 02:15:19 PM (IST)
Shashi Tharoor Controversy: पाकिस्तान को बेनकाब करने वाले डेलिगेशन में शशि थरूर के होने पर विवाद… ऐसा क्या हुआ कि कांग्रेस को लग गई मिर्ची
शशि थरूर और पीएम मोदी की फाइल फोटो

HighLights

  1. वैश्विक नेताओं से मिलेगा डेलिगेशन
  2. पाकिस्तान की असलियत बताएगा
  3. कांग्रेस ने साधा केंद्र पर निशाना

एजेंसी, नई दिल्ली (Shashi Tharoor Controversy)। केंद्र सरकार ने 7 सांसदों को मिलकर एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल (all-party delegation) बनाया है, जो विभिन्न देशों में जाकर पाकिस्तान की पोल खोलेगा। पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद पाकिस्तान को बेनकाब करने के लिए मोदी सरकार का यह बड़ा कदम बताया जा रहा है।

हालांकि, डेलिगेशन में कांग्रेस की ओर से शशि थरूर को शामिल किए जाने पर विवाद हो गया था। पहले तो केंद्र सरकार ने डेलिगेशन में शामिल करने के लिए कांग्रेस से सांसदों के नाम मांगे। फिर थरूर को चुन लिया, जिनका नाम कांग्रेस द्वारा सुझाए गए नामों में नहीं था।


डेलिगेशन में ये 7 नाम

  1. रविशंकर प्रसाद (भाजपा)
  2. शशि थरूर (कांग्रेस)
  3. संजय कुमार झा (जेडीयू)
  4. बैजयंत पांडा (भाजपा)
  5. कनिमोझी करुणानिधि (डीएमके)
  6. सुप्रिया सुले (एनसीपी)
  7. श्रीकांत एकनाथ शिंदे (शिवसेना)

कांग्रेस ने दिया थे ये विकल्प

  • आनंद शर्मा, गौरव गोगोई, सैयद नसीर हुसैन और अमरिंदर सिंह राजा वारिंग।

इससे पहले संसदीय कार्य मंत्रालय ने शनिवार को उन नेताओं के नामों की घोषणा की, जो 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद के घटनाक्रमों को लेकर विभिन्न देशों का दौरा करेंगे और वहां की लीडरशिप के सामने पाकिस्तान का आतंक परस्त चेहरा उजागर करेंगे।

प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस की ओर से थरूर को शामिल किया गया। इससे पहले उन्होंने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए ऑपरेशन सिंदूर की खुली तारीफ की थी। थरूर का यह रुख कांग्रेस नेतृत्व को पसंद नहीं आया था।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने नामों की घोषणा करते हुए कहा, सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में भारत एकजुट है। आतंकवाद के प्रति शून्य-सहिष्णुता (जीरो टॉलरेंस) के हमारे साझा संदेश को लेकर सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही प्रमुख साझेदार देशों का दौरा करेंगे।

थरूर के नाम का एलान होने के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा- ‘संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता से बात की थी। कांग्रेस से चार सांसदों के नाम सौंपने को कहा गया, ताकि पाकिस्तान से आतंकवाद पर भारत का रुख स्पष्ट करने के लिए विदेश भेजे जाने वाले प्रतिनिधिमंडलों के लिए नाम सुझाए जा सकें।’

‘इसके बाद सरकार ने कांग्रेस के दिए नामों में से किस को नहीं चुना। यह दर्शाता है कि सरकार की पॉलिसी नाकाम रही है।

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