नई दिल्ली। प्रणब मुखर्जी और शुभ्रा का विवाह 13 जुलाई 1957 को हुआ था। वह मूलतः जेस्सोर की रहने वाली थीं, जो अब बांग्लादेश में है। वह मात्र दस साल की उम्र में कोलकाता आकर बस गई थीं। 17 सितंबर, 1940 को जन्मी और स्नातक शुभ्रा कवि रबींद्रनाथ टैगोर की प्रशंसक थीं। वह न सिर्फ रबींद्र संगीत देश-विदेश में गाती थीं बल्कि उन्होंने टैगोर की नृत्य नाटिकाओं में भी भारत समेत यूरोप, एशिया और अफ्रीका में अभिनय किया।
उन्होंने 1982 में गीतांजली ट्रूप बनाया था। उनका आखिरी कार्यक्रम 2013 में हुआ जब उन्होंने नोमो नोमो गीत गाया। शुभ्रा गायन के अलावा एक अच्छी चित्रकार भी थीं। उन्होंने दो किताबें चोखेर ओलेय और चीना अचीनाई चिन लिखीं। पहली इंदिरा गांधी पर थी और दूसरी किताब उनकी चीन यात्रा पर आधारित थी।
लोधी रोड में आज अंतिम संस्कार राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता ने बताया कि उन्हें आर्मी रीसर्च एंड रेफरल अस्पताल में सांस में लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद 7 अगस्त को भर्ती कराया गया था। वह देश की पहली प्रथम महिला हैं जिनके पति के जीवित रहते उनका निधन हुआ है।
शुभ्रा के दो बेटे कांग्रेस सांसद अभिजीत, इंद्रजीत और एक बेटी शर्मिष्ठा हैं। शुभ्रा का पार्थिव शरीर राष्ट्रपति भवन में उनकी स्टडी के विपरीत स्थित एडीसी कक्ष में रखा गया है। जहां बड़े पैमाने पर गणमान्य लोग उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करने आ रहे हैं। अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ बुधवार को दिल्ली के लोधी रोड में किया जाएगा। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री और मुखर्जी परिवार की मित्र शेख हसीना बुधवार को दिल्ली आकर राष्ट्रपति से मिलकर अपनी शोक संवेदना प्रकट करेंगी।
पीएम ने प्रकट की शोक संवेदना देश की प्रथम महिला के निधन की खबर लगते ही उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कैबिनेट मंत्रियों ने अपने शोक संवेदनाएं प्रकट कीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके कहा, "श्रीमती शुभ्रा मुखर्जी के निधन के बारे में सुन कर बहुत दुख हुआ। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं राष्ट्रपति जी और उनके परिवार के साथ हैं।"
ममता बनर्जी ने जताया दुख
शुभ्रा मुखर्जी के निधन पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी दुख जताया है। मंगलवार को उन्होंने फेसबुक पर एक-एक कर कई शोक संदेश पोस्ट किए। मुख्यमंत्री ने लिखा कि "मैं सुभ्रा बोउदी (भाभी) को पिछले तीन दशक से जानती हूं। वह विनम्र, साधारण, मिलनसार और समर्पित किस्म की गृहिणी थीं।" इसके बाद वह शुभ्रा मुखर्जी के अंतिम दर्शन के लिए दिल्ली रवाना हो गईं।