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'SIR प्रक्रिया में कोई खामी नहीं पाई गई और यह आगे भी जारी रहेगी', EC को मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूचियों के लिए शुरू की गई ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक करार देते हुए चुनाव आयोग को बड़ी राहत दी है।

By Digital DeskEdited By: manoj dubey
Publish Date: Wed, 27 May 2026 12:20:00 PM (IST)Updated Date: Wed, 27 May 2026 12:32:24 PM (IST)
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'SIR प्रक्रिया में कोई खामी नहीं पाई गई और यह आगे भी जारी रहेगी', EC को मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूचियों के लिए शुरू की गई ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक करार देते हुए चुनाव आयोग को बड़ी राहत दी है।

HighLights

  1. चुनाव आयोग को बड़ी राहत दी
  2. SIR प्रक्रिया कानून के अनुरूप
  3. आयोग ने कानून के तहत किया काम

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूचियों के लिए शुरू की गई ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक करार देते हुए चुनाव आयोग को बड़ी राहत दी है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल इसलिए इस प्रक्रिया को अवैध नहीं ठहराया जा सकता कि यह मतदाता सूची संशोधन की सामान्य प्रक्रिया से अलग है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग को मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करने का अधिकार प्राप्त है और एसआईआर (SIR) उसी अधिकार के दायरे में की जा रही प्रक्रिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पूरी तरह कानून के अनुरूप है। कोर्ट ने यह भी माना कि चुनाव आयोग द्वारा मांगे गए दस्तावेज मनमाने नहीं हैं। पीठ ने कहा, 11 दस्तावेजों पर विचार किए जाने और हमारे आदेश के बाद आधार कार्ड को भी शामिल किए जाने के चलते यह नहीं कहा जा सकता कि आयोग द्वारा मांगे गए दस्तावेज अनुचित हैं।


सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति की पात्रता को लेकर चुनाव आयोग संतुष्ट नहीं होता है, तो ऐसे मामलों को कानून के तहत केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी के पास भेजना आयोग की जिम्मेदारी होगी।

‘चुनाव आयोग ने कानून के तहत किया काम’

शीर्ष कोर्ट ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं किया और पूरी कार्रवाई कानूनी दायरे में रहकर की गई। अदालत ने साफ किया कि इस प्रक्रिया में कोई खामी नहीं पाई गई है और यह आगे भी जारी रहेगी।

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पहले सुरक्षित रख लिया गया था फैसला

इस साल की शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि चुनाव आयोग के पास इतने बड़े पैमाने पर एसआईआर कराने का अधिकार नहीं है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए आयोग की कार्रवाई को सही ठहराया।

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