
नई दिल्ली। देश में नकली दवाओं का कारोबार खत्म करने के लिए सेंट्रल ड्रग रेगुलेटर ने 'ट्रेस एंड ट्रैक' मैकेनिज्म तैयार करने का प्रस्ताव रखा है। फिलहाल इसमें कमियां तलाशने और उसे बेहतर बनाने के लिए वह एक वर्किंग ग्रुप बनाया जा रहा है। इस मैकेनिज्म में यूनीक कोड्स का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है।
वर्किंग ग्रुप में फार्मास्युटिकल एसोसिएशन के प्रतिनिधि और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के सदस्य शामिल होंगे। यह ग्रुप अपने गठन के चार महीनों के भीतर समस्याओं और उनके उपयुक्त समाधानों पर अपनी रिपोर्ट पेश करेगा। बताते चलें कि 2014-16 में देशभर में किए गए एक सर्वे में पाया गया था कि भारत में बेची जा रहीं करीब 3 पर्सेंट दवाएं घटिया थीं जबकि करीब 0.023 पर्सेंट नकली थीं।
वहीं, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की ओर से नवंबर 2017 में जारी रिसर्च के अनुसार, कम आय वाले देशों के बाजारों में हर 10 मेडिकल प्रोडक्ट में से एक के या तो घटिया होने या नकली होने की आशंका है। इस पर नकेल कसने के लिए ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड ने 16 मई को हुई बैठक में 'ट्रेस एंड ट्रैक' मैकेनिज्म से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
प्रस्ताव के अनुसार, शीर्ष 300 फार्मास्युटिकल ब्रांड्स के लेबल्स पर 14 डिजिट्स का एक नंबर प्रिंट किया जाएगा। हर स्ट्रिप और बॉटल पर यूनीक नंबर होंगे। यह व्यवस्था लागू होने पर मरीज यह पता लगा सकेंगे कि जो दवाएं वे खरीद रहे हैं, वे असली हैं या नकली। दवा की मार्केटिंग करने वाली कंपनियां लेबल्स पर एक नंबर देंगी, जिस पर मरीज टेक्स्ट मेसेज कर यह जानकारी हासिल कर सकेंगे।