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7500, 7600 या 7700... जानिए बीच आसमान में फ्लाइट से क्यों भेजे गए ये सीक्रेट कोड्स और क्या है इनका खौफनाक मतलब

150 से अधिक यात्रियों को ले जा रहे इस विमान से क्रू द्वारा एक के बाद एक आपातकालीन संकेत (Emergency Signals) प्रसारित किए गए, जिसके बाद विमान की सऊदी अ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Thu, 01 Oct 2026 12:00:04 AM (IST)Updated Date: Thu, 01 Oct 2026 12:04:17 AM (IST)
7500, 7600 या 7700... जानिए बीच आसमान में फ्लाइट से क्यों भेजे गए ये सीक्रेट कोड्स और क्या है इनका खौफनाक मतलब
फ्लाइट के सीक्रेट कोड्स का मतलब (AI Image)

HighLights

  1. 4 अंकों के 'स्क्वॉक कोड' से ATC को मिलती है खतरे की जानकारी
  2. 7500 कोड हाईजैकिंग और 7700 इमरजेंसी के लिए होता है इस्तेमाल
  3. रेडियो संपर्क टूटने पर पायलट 7600 कोड ट्रांसमिट करते हैं

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुबई से तेल अवीव की ओर रवाना हुई 'फ्लाईदुबई' (Flydubai) की एक वाणिज्यिक उड़ान के दौरान हवा में अचानक आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो गई। 150 से अधिक यात्रियों को ले जा रहे इस विमान से क्रू द्वारा एक के बाद एक आपातकालीन संकेत (Emergency Signals) प्रसारित किए गए, जिसके बाद विमान की सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंडिंग कराई गई।

प्रारंभिक रिपोर्टों में इसे अपहरण (Hijacking) का मामला माना जा रहा था, हालांकि बाद में एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि कॉकपिट के भीतर पायलटों के बीच हुआ हिंसक विवाद और चाकूबाजी इस आपात स्थिति की वजह बनी। इस दौरान विमान से पहले 7700 और तत्पश्चात् 7500 कोड प्रसारित किए गए थे।


हवाई सफर के दौरान जब सामान्य संचार माध्यम सीमित होते हैं, तब एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को तुरंत स्थिति की गंभीरता समझाने के लिए विशेष कोड्स का उपयोग किया जाता है। आइए जानते हैं क्या हैं ये कोड्स और उड्डयन क्षेत्र में इनका क्या महत्व है।

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क्या हैं 'स्क्वॉक कोड' (Squawk Codes)?

हवाई जहाज और जमीन पर स्थित एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर के बीच संपर्क स्थापित करने के लिए ट्रांसपोंडर (Transponder) नामक उपकरण का उपयोग किया जाता है। इस प्रणाली के माध्यम से 4 अंकों का एक विशेष कोड ट्रांसमिट किया जाता है, जिसे 'स्क्वॉक कोड' कहा जाता है।

  • उद्देश्य: यह कोड केवल 0 से 7 तक के अंकों के संयोजन से बनता है। हर उड़ान के लिए एक अलग कोड निर्धारित होता है, जिससे ATC को विमान की स्थिति, ऊंचाई और गति की सटीक जानकारी स्क्रीन पर मिलती रहती है।
  • सुरक्षा चक्र: यदि ट्रांसपोंडर बंद हो जाए या गलत कोड दर्ज हो, तो घने हवाई क्षेत्र (Airspace) में विमानों के टकराने का खतरा बढ़ जाता है।

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(ये तस्वीर एआई की मदद से बनाई गई है)

अंतर्राष्ट्रीय उड्डयन संगठन (ICAO) के 3 प्रमुख इमरजेंसी कोड्स

इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेशन (ICAO) ने आपात स्थितियों के लिए तीन विशेष स्क्वॉक कोड निर्धारित किए हैं, जिनका अर्थ पूरी दुनिया में एक समान होता है...

1. स्क्वॉक 7500 (Squawk 7500) - अनधिकृत कब्जा या अपहरण (Hijacking)

जब किसी विमान का नियंत्रण अवैध रूप से छीन लिया जाता है या उस पर अपहरण का खतरा होता है, तब पायलट ट्रांसपोंडर पर '7500' सेट करता है। इसका सीधा अर्थ होता है कि विमान पर बाहरी या आंतरिक उपद्रवियों का नियंत्रण हो चुका है और जमीन पर मौजूद सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत रणनीतिक हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है।

2. स्क्वॉक 7600 (Squawk 7600) - रेडियो संचार विफलता (Radio Communication Failure)

यदि विमान का मुख्य रेडियो संपर्क तंत्र अचानक ठप पड़ जाए और पायलट की ATC से बोलकर बात न हो पा रही हो, तो '7600' कोड दर्ज किया जाता है। यह कोड देखते ही ATC समझ जाता है कि पायलट सुन या बोल नहीं पा रहा है और तदनुसार रनवे और हवाई मार्ग को खाली कराकर सुरक्षित लैंडिंग की व्यवस्था की जाती है।

3. स्क्वॉक 7700 (Squawk 7700) - सामान्य या तकनीकी आपातकाल (General Emergency)

यह सबसे व्यापक आपातकालीन कोड है। विमान में किसी भी प्रकार की यांत्रिक खराबी, इंजन फेलियर, ईंधन की कमी या किसी यात्री की गंभीर मेडिकल इमरजेंसी होने पर पायलट '7700' प्रसारित करता है। यह कोड मिलते ही नजदीकी एयरपोर्ट पर फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस सहित तमाम आपात सेवाएं अलर्ट मोड पर आ जाती हैं।

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