
नई दिल्ली, ब्यूरो। राजधानी दिल्ली के चुनावी फैसले से पहले ही इसकी धमक दूसरे राज्यों तक महसूस होने लगी है। खासकर भाजपा की रणनीति ने प्रदेश के पार्टी नेताओं के माथे पर बल डाल दिया है। किरण बेदी को मुख्यमंत्री चेहरा बनाने के बाद दिल्ली के नेताओं को तो शांत रहने का संकेत दे दिया गया है, लेकिन दूसरे खासकर चुनावी राज्यों में पार्टी नेता व कार्यकर्ता आशंकित होने लगे हैं। यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह फॉर्मूला अन्य स्थानों पर भी लागू हो सकता है।
दिल्ली में आप के खिलाफ आक्रामक चेहरे की कमी से जूझती रही भाजपा ने पूर्व आईपीएस किरण बेदी पर दांव लगाया है। पार्टी में शामिल होने के सौ घंटे के अंदर उन्हें मुख्यमंत्री उम्मीदवार भी घोषित कर दिया गया। नेतृत्व के सख्त संकेत के बाद दिल्ली के पुराने नेताओं ने फैसले को स्वीकार कर जुबान भी बंद कर ली है, लेकिन इसका असर दिल्ली से बाहर होने लगा है। इस साल के अंत तक बिहार में चुनाव होने हैं, जहां भाजपा के लिए नाक की लड़ाई मानी जा रही है।
हालांकि, बिहार की राजनीति और स्थिति दिल्ली से पूरी तरह अलग है और वहां चेहरों की कमी भी नहीं है। लेकिन सूत्रों की मानें तो बिहार नेताओं में किरण की घोषणा बड़ी चर्चा का विषय है। खासकर तब जबकि वहां विपक्ष एकजुट हो रहा है और भाजपा नेतृत्व को लेकर चुप्पी है। दूसरी तरफ अपनी पार्टी में ही घिरे मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के सहारे जनता परिवार पर भाजपा हमलावर है। बताते हैं कि पूर्व में मांझी ने अपने पुत्र के लिए सीट को लेकर भी भाजपा नेतृत्व से चर्चा की थी। पिछले दिनों बयानों और कुछ काम के जरिये मांझी दलितों के बीच खुद को नेता स्थापित करने की कोशिशों में भी जुटे दिखे। ऐसे में प्रदेश के नेताओं व कार्यकर्ताओं में दिल्ली की घटना को बारीकी से देखा जा रहा है।