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गर्मी इस साल बनाएगी नया रिकॉर्ड, जानें क्या है 'सुपर अल नीनो', भारत के लिए क्यों खतरनाक है यह 'क्लाइमेट विलेन'?

प्रचंड गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच इस साल 'सुपर अल नीनो' की आहट ने वैज्ञानिकों और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है।

By Dheeraj BelwalEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 27 Apr 2026 06:01:58 PM (IST)Updated Date: Mon, 27 Apr 2026 06:10:59 PM (IST)
गर्मी इस साल बनाएगी नया रिकॉर्ड, जानें क्या है 'सुपर अल नीनो', भारत के लिए क्यों खतरनाक है यह 'क्लाइमेट विलेन'?
इस साल मानसून और स्वास्थ्य के लिए चुनौती।

HighLights

  1. मई-जुलाई के बीच अल नीनो होने की चेतावनी
  2. मानसून में देरी और कम बारिश की आशंका
  3. इस साल मानसून और स्वास्थ्य के लिए चुनौती

लाइफस्टाइल डेस्क। प्रचंड गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच इस साल 'सुपर अल नीनो' की आहट ने वैज्ञानिकों और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। पंजाब, दिल्ली से लेकर बिहार और ओडिशा तक पारा रिकॉर्ड तोड़ रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह तो बस शुरुआत है। वर्ल्ड मिटियोरोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन (WMO) की ताजा चेतावनी के अनुसार, मई से जुलाई के बीच अल नीनो का प्रभाव अपने चरम पर हो सकता है।

आइए विस्तार से समझते हैं कि यह 'सुपर अल नीनो' क्या है और यह आपकी जिंदगी पर कैसे असर डालेगा।

क्या है सुपर अल नीनो?

अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु चक्र है जो प्रशांत महासागर में हर 2 से 7 साल में घटित होता है। सामान्य परिस्थितियों में समुद्री हवाएं गर्म पानी को एशिया की ओर धकेलती हैं, लेकिन अल नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। नतीजतन, मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक हो जाता है।


जब प्रशांत महासागर की सतह का तापमान औसत से +2.0°C या उससे अधिक बढ़ जाता है, तो इसे 'सुपर अल नीनो' कहा जाता है। यह मानसून और बारिश के पूरे चक्र को तहस-नहस करने की ताकत रखता है।

भारत के लिए 'खतरे की घंटी'

प्रशांत महासागर में होने वाली यह हलचल हजारों मील दूर भारत के मौसम को तीन मुख्य तरीकों से प्रभावित कर सकती है:

  • रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अप्रैल से जून के बीच उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में भीषण लू चलने वाली है। सुपर अल नीनो इस तीव्रता को इतना बढ़ा सकता है कि पारा 45°C से 48°C के घातक स्तर को पार कर जाए।
  • कमजोर मानसून और सूखा: भारत की खेती और अर्थव्यवस्था मानसून पर टिकी है। सुपर अल नीनो मानसूनी हवाओं को कमजोर कर देता है, जिससे बारिश में भारी कमी आ सकती है। इससे फसलों की पैदावार और जल स्तर पर बुरा असर पड़ सकता है।

  • हेल्थ इमरजेंसी: भीषण गर्मी और उमस सीधे तौर पर हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और सांस की बीमारियों को न्यौता देती है। बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह समय विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
  • स्थिति तापमान में वृद्धि (औसत से) प्रभाव का स्तर
    सामान्य स्थिति 0°C संतुलित मौसम
    अल नीनो 0.5°C से 1.4°C सामान्य से कम बारिश, गर्मी
    सुपर अल नीनो +2.0°C या अधिक सूखा, भीषण गर्मी और प्राकृतिक आपदा

    सावधानी के लिए क्या करें?

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण 'सुपर अल नीनो' जैसी घटनाएं अब अधिक बार और अधिक तीव्रता के साथ हो रही हैं। आने वाले महीनों में खुद को हाइड्रेटेड रखना, दोपहर की धूप से बचना और पानी के संरक्षण पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। लू के दौरान ओआरएस (ORS) का घोल साथ रखें और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें।