मणिपुर के राहत कैंपों में हुई मौतों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की फटकार, 25 संदिग्ध मौतों पर मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट
गुरुवार को मणिपुर के राहत शिविरों में संदिग्ध मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।
Publish Date: Thu, 17 Sep 2026 05:02:19 PM (IST)Updated Date: Thu, 17 Sep 2026 05:02:19 PM (IST)
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई राज्य सरकार को फटकार, फाइल फोटोHighLights
- राहत कैंपों में हुई मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
- राज्य सरकार को लगाई कड़ी फटकार
- 25 मौतों पर मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गुरुवार को मणिपुर के राहत शिविरों में संदिग्ध मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार को मणिपुर के राहत शिविरों में हुई कथित अप्राकृतिक मौतों और यौन उत्पीड़न के मामलों पर गंभीर चिंता जताई।
इस संबंध में अदालत ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने मणिपुर के मुख्य सचिव से राहत शिविरों में हुई 25 संदिग्ध मौतों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी। इसमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मौत की वजह से जुड़े सभी दस्तावेज भी शामिल हैं।
2023 में हुई जातीय हिंसा पर सुनवाई
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच मणिपुर में साल 2023 की जातीय हिंसा से जुड़े यौन हिंसा के मामलों की जांच और कार्यवाही से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य न्यायाधीश ने राज्य सरकार से कहा, आप अपने मुख्य सचिव से कहें कि वे अदालत को आदेश जारी करने के लिए मजबूर न करें। हमें बताएं कि आपने क्या कदम उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर सरकार को निर्देश दिया कि वह मीडिया में बताई गई राहत शिविरों में हुई सभी 25 संदिग्ध मौतों की पूरी जानकारी दे।
मौतों पर की जाए FIR दर्ज
देश की सर्वोच्च अदालत के आदेश में बताई गई रिपोर्ट के अनुसार, आठ जिलों में बने राहत कैंपों में 640 मौतें दर्ज की गई हैं। इनमें से सिर्फ 20 मामलों में ही पोस्टमॉर्टम किया गया, जबकि आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे।
कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि सिर्फ 20 पोस्टमार्टम क्यों किए गए और कई मामलों में सिर्फ 20 हजार से 30 हजार रुपए का मुआवजा क्यों दिया गया। मणिपुर लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी संदिग्ध मौतों के लिए एफआईआर दर्ज की जाए और मौत के कारणों की ठीक से जांच की जाए।