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सुप्रीम कोर्ट का SC-ST एक्ट पर ऐतिहासिक फैसला: धर्म परिवर्तन करने पर खत्म होगा SC दर्जा, नहीं मिलेंगे आरक्षण और कानूनी लाभ

Supreme Court On SC/ST Act: सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट पर महत्वपूर्ण फैसला दिया है।

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Tue, 24 Mar 2026 12:35:45 PM (IST)Updated Date: Tue, 24 Mar 2026 12:44:03 PM (IST)
सुप्रीम कोर्ट का SC-ST एक्ट पर ऐतिहासिक फैसला: धर्म परिवर्तन करने पर खत्म होगा SC दर्जा, नहीं मिलेंगे आरक्षण और कानूनी लाभ
सुप्रीम कोर्ट ने एससी दर्जे पर अहम फैसला सुनाया (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 1950 के आदेश को कोर्ट ने पूरी तरह लागू माना
  2. अन्य धर्म अपनाने पर नहीं मिलेंगे आरक्षण और लाभ
  3. आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को ठहराया सही

डिजिटल डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एससी-एसटी एक्ट (Supreme Court on SC/ST Act)से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो उसे अनुसूचित जाति (SC) का सदस्य नहीं माना जा सकता।

धर्म परिवर्तन पर खत्म होगा एससी दर्जा

जस्टिस पी. के. मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने के साथ ही अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत और पूरी तरह समाप्त हो जाता है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि यह नियम बिना किसी अपवाद के लागू होता है।


1950 के आदेश का हवाला

अदालत ने अपने फैसले में संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि इस आदेश के क्लॉज 3 में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि केवल निर्धारित धर्मों के अंतर्गत आने वाले लोग ही अनुसूचित जाति का लाभ ले सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति इन धर्मों के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो उसका एससी दर्जा स्वतः समाप्त हो जाएगा।

कानूनी लाभ और आरक्षण पर रोक

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा, वह किसी भी कानून के तहत मिलने वाले वैधानिक लाभ, सुरक्षा, आरक्षण या अधिकार का दावा नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि कोई व्यक्ति एक साथ किसी अन्य धर्म का पालन करते हुए अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं रख सकता।

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले पर मुहर

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के पहले के फैसले को भी सही ठहराया। हाई कोर्ट ने कहा था कि जो लोग ईसाई धर्म अपनाते हैं और उसका सक्रिय रूप से पालन करते हैं, वे अनुसूचित जाति का दर्जा बनाए नहीं रख सकते। सुप्रीम कोर्ट ने इस निर्णय को बरकरार रखते हुए स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में कानून पूरी तरह स्पष्ट है।