इंतजार हुआ खत्म... 20 जनवरी के बाद दौड़ेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, 2500 यात्री एक साथ कर सकेंगे सफर, जानें पूरी डिटेल
India's First Hydrogen Train: भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन अपनी पहली कमर्शियल यात्रा के लिए पूरी तरह तैयार है। यह अत्याधुनिक ट्रेन हरियाणा के जींद पहुंच चुकी है, जहां लखनऊ की RDSO की टीमें इसके तकनीकी पहलुओं और सेफ्टी सिस्टम की बारीकी से जांच कर रही हैं।
Publish Date: Sun, 04 Jan 2026 06:04:46 PM (IST)Updated Date: Sun, 04 Jan 2026 06:04:46 PM (IST)
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन।HighLights
- स्वदेशी तकनीक का वैश्विक डंका, प्रदूषण को 'बाय-बाय'
- भारत ने बनाई दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन
- 140 की रफ्तार से जींद-सोनीपत रूट पर भरेगी उड़ान
डिजिटल डेस्क। भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन अपनी पहली कमर्शियल यात्रा के लिए पूरी तरह तैयार है। यह अत्याधुनिक ट्रेन हरियाणा के जींद पहुंच चुकी है, जहां लखनऊ की RDSO (अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन) की टीमें इसके तकनीकी पहलुओं और सेफ्टी सिस्टम की बारीकी से जांच कर रही हैं।
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20 जनवरी के बाद शुरू हो सकता है सफर
रेलवे अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन 20 जनवरी 2026 के बाद कभी भी जींद-सोनीपत रूट पर अपनी नियमित सेवा शुरू कर सकती है। वर्तमान में हाइड्रोजन प्लांट और ट्रेन के बीच तालमेल की टेस्टिंग चल रही है। जैसे ही आरडीएसओ की टीम हरी झंडी देगी, यात्रियों के लिए यह सेवा शुरू कर दी जाएगी।
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तकनीकी रूप से दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन
भारत में निर्मित यह ट्रेन ब्रॉड गेज पर चलने वाली दुनिया की सबसे लंबी और शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन मानी जा रही है।
- क्षमता: 10 कोच वाली इस ट्रेन में एक साथ 2500 यात्री सफर कर सकेंगे।
- पावर: इसकी कुल क्षमता 2400 किलोवाट है (1200 किलोवाट की दो ड्राइविंग पावर कार)।
- रफ्तार: यह ट्रेन 140 किमी/घंटा की अधिकतम गति से दौड़ने में सक्षम है।
- ईंधन दक्षता: 360 किलो हाइड्रोजन के साथ यह ट्रेन 180 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
यह ट्रेन पूरी तरह से 'ग्रीन एनर्जी' पर आधारित है। इसमें इंजन की जगह हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इस प्रक्रिया में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रतिक्रिया से बिजली पैदा होती है, जो ट्रेन की मोटरों को चलाती है और बैटरियों को चार्ज करती है। सबसे खास बात यह है कि इस इंजन से धुएं की जगह सिर्फ पानी और भाप निकलती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन शून्य हो जाता है।
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मेट्रो जैसी सुविधाएं और आरामदायक सफर
चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में तैयार इस ट्रेन पर करीब 82 करोड़ रुपये की लागत आई है। यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए इसमें कई आधुनिक फीचर्स जोड़े गए हैं:
- मेट्रो स्टाइल: स्वचालित दरवाजे और स्टेशन की जानकारी देने वाले डिजिटल डिस्प्ले।
- ध्वनि रहित सफर: हाइड्रोजन इंजन होने के कारण यह ट्रेन चलते समय शोर नहीं करती।
- सुविधाएं: सभी कोच पूरी तरह वातानुकूलित (AC) हैं और इनमें आधुनिक लाइट व पंखे लगाए गए हैं।