
विशाखापत्तनम। गैर भाजपा और गैर कांग्रेस पार्टियों के रूप में तीसरे मोर्चे के गठन के विचार को माकपा ने सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है इसको लेकर किसी तरह के विचार पर काम नहीं किया जा रहा है। इसके पीछे उसने दलील दी कि क्षेत्रीय दलों के साथ एक राष्ट्रीय गठबंधन कायम नहीं हो सकता है। माकपा की ओर से यह घोषणा ऐसे समय की गई है जब बुधवार को ही सपा, राजद और जदयू समेत छह क्षेत्रीय दलों ने जनता परिवार की छतरी के नीचे आने का एलान किया है।
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में गुरुवार से शुरू हुए माकपा के 21वें सम्मेलन के दौरान पार्टी महासचिव प्रकाश करात ने तीसरे मोर्चे के गठन को लेकर तस्वीर बिल्कुल साफ कर दी है। उनका कहना है कि भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार की नीतियों के खिलाफ हमारी पार्टी विभिन्न मुद्दों पर क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर काम करेगी, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह का गठबंधन फिलहाल संभव नहीं है।
करात ने कहा, "मुद्दों के आधार पर हम उन दलों के साथ आंदोलनों और संघर्षों में शामिल हो सकते हैं। हालांकि यह जरूर संभव है कि हमारी पार्टी कुछ राज्यों में क्षेत्रीय दलों के साथ चुनावी गठबंधन कर सकती है। लेकिन हम राष्ट्रीय स्तर पर किसी गठबंधन या मोर्चे को प्रोजेक्ट नहीं कर सकते हैं।"
राजनीतिक संकट से जूझ रही और अपने अस्तित्व को बचाने के लिए लड़ रही माकपा का छह दिवसीय सम्मेलन मंगलवार को यहां शुरू हुआ। दस साल तक पार्टी महासचिव के पद पर रहने के बाद प्रकाश करात सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके उत्तराधिकारी के तौर पर पोलित ब्यूरो सदस्य और राज्यसभा सदस्य सीताराम येचुरी का नाम सबसे आगे चल रहा है।