दिल्ली। राफेल सौदे और कावेरी मामले पर विरोध और शोरशराबे के बीच लोकसभा ने सोमवार को किन्नरों (ट्रांसजेंडर) को अलग पहचान देकर उन्हें सशक्त बनाने वाला विधेयक पारित कर दिया। इस विधेयक को 27 संशोधनों के साथ पारित किया गया है। द ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) बिल, 2016 में ट्रांसजेंडर्स को परिभाषित करने के अलावा उनके साथ भेदभाव को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस विधेयक को दो साल पहले लोकसभा में पेश किया गया था।

शोरशराबे के बीच तृणमूल कांग्रेस की काकोली घोष दस्तीदार और माकपा के बदरुद्दोजा खान समेत पांच सदस्यों ने बहस में हिस्सा लिया और विधेयक के प्रावधानों पर सवाल उठाए। दस्तीदार ने कहा, 'पहले हमें ट्रांसजेंडर को परिभाषित करना चाहिए... लिहाजा इस बिल को वापस लिया जाना चाहिए।'

उन्होंने कहा कि बिल का सही तरीके से मसौदा तैयार करके ही इसे पेश किया जाना चाहिए। शोरशराबे के ही बीच संसदीय कार्य मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार किसी भी तरह की चर्चा के लिए तैयार है। वहीं, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा कि बिल को स्थायी समिति के पास भेजा गया था और सरकार ने समिति के 27 सुझावों को स्वीकार किया है। माकपा के बदरुद्दोजा खान ने कहा कि बिल में ट्रांसजेंडर की परिभाषा स्पष्ट नहीं है।

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