
डिजिटल डेस्क। Union Budget 2026 of India। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण(FM Nirmala Sitharaman Presents Union Budget 2026) इस बार यूनियन बजट के जरिए 75 साल पुरानी एक अहम परंपरा में बदलाव करने जा रही हैं। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, बजट भाषण के पार्ट-B की भूमिका अब पहले जैसी सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें भारत के दीर्घकालिक आर्थिक विजन को विस्तार से पेश किया जाएगा।
अब तक बजट के पार्ट-A में विकास योजनाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े लक्ष्य रखे जाते थे, जबकि पार्ट-B केवल टैक्स बदलाव और कुछ नीतिगत प्रस्तावों तक सीमित होता था। लेकिन इस बार तस्वीर बदली हुई नजर आएगी।
पार्ट-B में दिखेगा भारत का फ्यूचर रोडमैप
इस बार पार्ट-B में सिर्फ शॉर्ट-टर्म फैसले नहीं, बल्कि भारत की लॉन्ग-टर्म आर्थिक रणनीति, घरेलू मजबूती और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को सामने रखा जाएगा। भारत जब 21वीं सदी के दूसरे चरण में प्रवेश कर रहा है, ऐसे में सरकार यह साफ करना चाहती है कि देश किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
अर्थशास्त्रियों और निवेशकों के लिए यह बदलाव अहम माना जा रहा है, क्योंकि अब बाजार केवल टैक्स दरों पर नहीं, बल्कि पूरे आर्थिक रोडमैप पर नजर रखेगा।
बाजारों के लिए क्यों खास है यह बदलाव
रिपोर्ट के अनुसार, पार्ट-B में भारत की मौजूदा आर्थिक क्षमताओं, भविष्य की संभावनाओं और वैश्विक मंच पर भूमिका को विस्तार से रखा जाएगा। इससे निवेशकों को यह संकेत मिलेगा कि सरकार अर्थव्यवस्था को किस दिशा में ले जाना चाहती है। इसी वजह से बाजारों में इस बदलाव को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।
बजट पेश करने के अंदाज में भी लगातार बदलाव
निर्मला सीतारमण लगातार 9वीं बार बजट पेश कर रही हैं। 2019 में उन्होंने लेदर ब्रिफकेस की परंपरा खत्म कर लाल कपड़े में लिपटा बही-खाता अपनाया था। पिछले चार वर्षों से बजट पूरी तरह पेपरलेस है और टैबलेट के जरिए पेश किया जाता है। इस बार भी यही प्रक्रिया जारी रहने की संभावना है।
कैपेक्स और फिस्कल अनुशासन पर नजर
सरकार ने फिस्कल 2026 में जीडीपी के 4.5% से कम फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य हासिल कर लिया है। अब निगाहें फिस्कल 2027 के लिए डेट-टू-जीडीपी अनुपात घटाने की रणनीति पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि सरकार अगला स्पष्ट फिस्कल डेफिसिट लक्ष्य घोषित करती है या नहीं।
मौजूदा वित्त वर्ष में कैपिटल एक्सपेंडिचर 11.2 लाख करोड़ रुपये रखा गया था। निजी निवेश अभी सतर्क है, इसलिए सरकार के कैपेक्स पर जोर बनाए रखने की उम्मीद है। नए बजट में इसमें 10–15% बढ़ोतरी संभव मानी जा रही है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।
जीडीपी, महंगाई और योजनाओं पर भी फोकस
बजट में फिस्कल 2027 के लिए नाममात्र जीडीपी ग्रोथ का अनुमान भी सामने आ सकता है, जिससे महंगाई के रुख का संकेत मिलेगा। अनुमान है कि सरकार 10.5–11% के बीच ग्रोथ प्रोजेक्शन दे सकती है।
इसके साथ ही पीएम ग्राम सड़क योजना, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सेक्टरों में आवंटन पर भी खास नजर रहेगी, ताकि ग्रामीण और शहरी विकास के बीच संतुलन बनाया जा सके।