
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने डिजिटल भुगतान को लेकर एक नया निर्देश जारी किया है। इसके तहत ₹2,000 से अधिक राशि वाले चुनिंदा यूपीआई (UPI) लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत का मामूली शुल्क लगाया जाएगा। हालांकि, एनपीसीआई ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले से आम उपभोक्ताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा और उनके लिए यूपीआई सेवाएं पहले की तरह पूरी तरह से मुफ्त रहेंगी।
Regarding Merchant Discount Rate (MDR) on Select UPI (P2M) Transactions
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— NPCI (@NPCI_NPCI) September 15, 2026
जारी अधिसूचना के अनुसार, इस नए इंटरचेंज शुल्क का भुगतान केवल व्यापारियों द्वारा किया जाएगा। ग्राहक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के ₹2,000 से अधिक का भुगतान पहले की तरह आसानी से करते रहेंगे।
सरकार और एनपीसीआई का मुख्य उद्देश्य डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को और अधिक मजबूत बनाना तथा इसे लंबे समय तक सुचारू रूप से संचालित रखना है। इस व्यवस्था से भुगतान प्रणालियों (Payment Service Providers) को वित्तीय सहायता मिलेगी, जबकि आम यूज़र के अनुभव पर इसका कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।
2,000 रुपये से अधिक के उच्च मूल्य वाले UPI लेन-देन (P2M) पर ही केवल मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाया जाएगा, जिसे व्यापारियों द्वारा वहन किया जाएगा...
उच्च मूल्य वाले लेन-देन से प्राप्त होने वाले तर्कसंगत MDR शुल्क को UPI इकोसिस्टम के विभिन्न हितधारकों (बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स आदि) में वितरित किया जाएगा। इस राशि का उपयोग साइबर सुरक्षा, सिस्टम की मजबूती और नए नवाचारों (Innovations) में निवेश के लिए होगा।
इसके साथ ही, टियर-3 और छोटे शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए एक समर्पित 'स्मॉल मर्चेंट फंड' (Small Merchant Fund) भी स्थापित किया जाएगा, जिससे डिजिटल अर्थव्यवस्था में छोटे व्यवसायों की भागीदारी को और अधिक गति मिलेगी।