
जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। उरी में भारतीय़ सैन्य प्रतिष्ठान पर हमला महज एक संयोग है या पाक सेना व आइएसआइ का भारत सरकार को संदेश देने का तरीका। इसका पता तो शायद ही चल पाए, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत और पाकिस्तान के पहले से बिगड़ चुके रिश्ते को यह हमला और खराब कर देगा।
भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के ठीक एक दिन बाद हुए इस हमले को कई जानकार पाक खुफिया एजेंसियों व सेना और पीएम नवाज शरीफ के बीच चल रहे टकराव से जोड़ कर भी देख रहे हैं। दरअसल, पीएम नरेंद्र मोदी ने ठीक नौ महीने पहले 25 दिसंबर, 2015 को शरीफ के जन्मदिन पर अचानक लाहौर स्थित उनके घर पहुंच कर भारत व पाक के रिश्ते की बेहतरी की उम्मीद जताई थी। जबकि शनिवार (17 सितंबर, 2016) को मोदी के जन्म दिन पर शरीफ ने न तो मोदी को कॉल किया और न ही कोई संदेश भेजा। इस तरह से मोदी ने पीएम की शपथ लेने के साथ ही मोदी के साथ व्यक्तिगत तौर पर रिश्ते बनाने की जो कोशिश की थी, उसका भी अब इतिश्री हुआ माना जा रहा है।
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बहरहाल, उरी हमले के भारत और पाकिस्तान के कड़वे रिश्तों के और खराब होने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा रहा। सूत्र बताते हैं कि अब जबकि दस दिनों के भीतर ही संयुक्त राष्ट्र की बैठक होने वाली है, भारत इसमें उरी में हुए हमले के मुद्दे को उठाने से नहीं चूकेगा। संयुक्त राष्ट्र की सालाना बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व इस बार विदेश मंत्री सुषमा स्वराज करेंगी।
भारत ने पहले ही इस बात का संकेत दिया है कि इस बार कश्मीर में आतंक फैलाने की पाकिस्तान की साजिश का पर्दाफाश करने में वह कोई कसर नहीं छोड़ेगा। समूह-20 और आसियान बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी ने साफ तौर पर कहा कि दक्षिण एशिया में सिर्फ एक देश है जो आतंक को एक राष्ट्रीय नीति के तौर पर बढ़ावा दे रहा है। दीगर बात यह है कि उधर पाकिस्तान ने भी संयुक्त राष्ट्र की बैठक में कश्मीर मुद्दे को उछालने की पूरी तैयारी कर चुका है। स्वयं पीएम शरीफ इस बैठक में जा रहे हैं।
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सूत्र यह भी बताते हैं कि उरी हमले ने नवंबर, 2016 में इस्लामाबाद में होने वाली सार्क शिखर बैठक की बची खुची उम्मीदों को भी खत्म कर दिया है। इस बैठक में पीएम मोदी को भी आमंत्रित किया गया है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान पीएम के रवैये में आया बदलाव साफ तौर पर दिखा रहा है कि वह भारत के साथ दोस्ताना रिश्तों को लेकर अब बहुत इच्छुक नहीं है।
जनवरी, 2016 में जब पठानकोट हमला हुआ था, तब शरीफ ने मोदी को फोन कॉल किया और इसकी जांच में पूरी मदद करने का आश्वासन भी दिया। इस हमले के दो हफ्ते पहले ही उनके बुलावे पर मोदी अचानक ही उनके जन्मदिन पर लाहौर पहुंचे थे। उसके बाद अप्रैल, 2016 में केरल मंदिर आग कांड के बाद शरीफ ने मोदी को फोन किया था और अपना दुख प्रकट किया था।
इसके बाद मई, 2016 जब लंदन में उन्हें दिल के ऑपरेशन के लिए व्हील चेयर से ले जाया जा रहा था तब उन्होंने मोदी को फोन किया था। ऑपरेशन के बाद मोदी ने उन्हें जरुर कॉल किया लेकिन तब तक कश्मीर में हालात बिगड़ने शुरु हो गए थे।
इस बार ईद-उल-अजहा के अवसर पर भी दोनों नेताओं के बीच बात होने की कोई सूचना नहीं है। ना ही सरकार की तरफ से मोदी के जन्मदिन पर शरीफ की तरफ से कोई कॉल आने की सूचना दी गई है। इसके पहले दोनों नेताओं के बीच शॉल डिप्लोमेसी भी चली थी जिसमें मोदी और शरीफ ने एक-दूसरे की मां के लिए शॉल भेजे थे।