
नीलू रंजन, नई दिल्ली। हर आतंकी हमले के बाद भले की पाकिस्तान को माकूल जवाब देने की बात उठती हो। लेकिन परमाणु प्रतिरोधक क्षमता से लैस पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई के विकल्प सीमित हैं। पाकिस्तान इसी का नाजायज फायदा उठाता रहा है। पाकिस्तान में चल रहे आतंकी कैंपों पर सर्जिकल स्ट्राइक का विकल्प भी खतरे से खाली नहीं है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कश्मीर में कड़ा रूख अख्तियार करने वाली नरेंद्र मोदी सरकार पाकिस्तान में चल रही आतंकी की फैक्ट्री पर क्या कार्रवाई करती है।
सुरक्षा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि भारत के पास पाकिस्तान के खिलाफ छद्म या सीधा किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई का विकल्प नहीं है। भारत न तो पाकिस्तान के खिलाफ सीधा युद्ध का ऐलान कर सकता है और न ही उस तरह सर्जिकल ऑपरेशन कर सकता है, जैसा पिछले साल म्यांमार में एनएससीएन (खापलांग) के खिलाफ किया था।
जून 2015 में 18 भारतीय सैनिकों की मौत का बदला लेने के लिए भारतीय सेना की टुकड़ी ने म्यांमार के भीतर आतंकी अड्डों को नष्ट कर दिया था। पाकिस्तान में यह विकल्प भी नहीं है, क्योंकि इससे पूरी जंग शुरू होने की आशंका रहेगी, जो दो परमाणु हथियार संपन्न देशों के बीच घातक हो सकता है।
सैन्य कार्रवाई के विकल्प के बजाय सुरक्षा विशेषज्ञ पाकिस्तान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों को ज्यादा कारगर मान रहे हैं। पिछले दिनों अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने इसका संकेत भी दे दिया। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि भारत से सामानों की आवाजाही के लिए ट्रांजिट रूट नहीं दिया गया तो वे पाकिस्तानी ट्रकों को अफगानिस्तान के रास्ते मध्य एशियाई देशों में नहीं जाने देंगे।
इस पर पूरे पाकिस्तान में बवाल में मच गया था। आर्थिक प्रतिबंधों का समर्थन करते हुए सुरक्षा विशेषज्ञ व इंस्टीट्यूट ऑफ कनफ्लीक्ट मैनेजमेंट के अजय साहनी कहते है कि एक बार भारत ने पाकिस्तान के हवाई जहाजों का भारतीय आकाश से उड़ान रोक दी थी। तब एक महीने के भीतर पाकिस्तान की हालात खराब हो गई थी।
अजय साहनी के अनुसार अफगानिस्तान का व्यापारिक रूट बंद करना या भारतीय आकाश को पाकिस्तानी हवाई जहाज के लिए बंद करना महज उदाहरण भर हैं। इसके अलावा 1000 ऐसे तरीके से जिससे पाकिस्तान बिना युद्ध के भी तत्काल घुटने टेकने पर मजबूर हो जाएगा।
अजय साहनी ने कहा कि लेकिन अफसोस यह है कि भारत ने इसके लिए कभी भी राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई है। उन्होंने दुख जताया कि पाकिस्तान के असली चेहरे को जानते हुए भी मोदी सरकार ने दो साल पाकिस्तान को मनाने में बर्बाद कर दिया।