अनुज सैनी, शामली। कोई सुरक्षा को लेकर सहम जाता है, कोई अपनी बहू-बेटियों की इज्जत का वास्ता देता है। उत्तर प्रदेश के शामली जिला स्थित कैराना से पलायन करने वाला कोई ऐसा नहीं मिला जो यह कहे कि वह कारोबार बढ़ाने या अपनी मर्जी से घर-बार छोड़ रहा है। यहां से जो लोग गए हैं, उनमें से ज्यादातर भय के मारे थे। कस्बे के ढाई सौ से अधिक परिवारों के पलायन के बाद कुछेक गांवों में भी डर का डेरा है।

पंजीठ गांव के महिपाल सिह के परिवार ने शुक्रवार को सामान बांधना भी शुरू कर दिया। चौ. पहल सिह जिम्मेदार लोगों को लेकर महिपाल के घर पहुंचे और उन्हें समझाया।

पंजीठ गांव का माहौल खराब हो चुका है। लड़कियों को कालेज भेजें तो एक आदमी अलग से ले जाने और लाने के लिए चाहिए, वरना बेटियों से छेड़छाड़ होती है। जुबान खोलने पर जानलेवा हमले होते हैं। रोजगार कम हो तो झेल लें, लेकिन अस्मत पर आंच कैसे बर्दास्त कर सकते हैं? यह कहना है महिपाल का।

नईदुनिया के सहयोगी प्रकाशन दैनिक जागरण टीम ने महिपाल की पत्नी रोमा से कई बार पूछा तो उन्होंने कहा कि कुछ आवारा लोग महिलाओं को आते-जाते परेशान करते रहते हैं। यहां पंचायत भी हुई लेकिन महिपाल यहां रहने का मन नहीं बना पाए। गांव पंजीठ में छोटा सा स्कूल चला रहे डॉ. जगदेव सिह, गोपाल सिह, मुकेश कुमार, प्रमोद कुमार, ब्रह्मादत्त शर्मा भी गांव के माहौल से बेहद परेशान हैं। पांचों परिवार पलायन के मूड में हैं। डॉ. जगदेव सिह ने बताया कि असामाजिक तत्व पूरी तरह से गांव में हावी हो चुके हैं।

सांसद हुकुम सिह का कहना है कि कैराना से ढाई सौ से अधिक लोगों का पलायन बेहद गंभीर है। गृहमंत्री राजनाथ सिह व प्रदेश सरकार भी गंभीर है। हालांकि राज्य सरकार कोई प्रतिक्रिया न करते हुए प्रकरण को दबाने की मंशा पाले हुए है। जिलाधिकारी सुजीत कुमार ने बताया कि गांव में पलायन की फिलहाल कोई सूचना नहीं मिली। आइजी जोन सुजीत पांडेय एसपी शामली को पलायन की पड़ताल करने के लिए कहा गया है। पता लगाया जा रहा है कि दो सालों में वाकई कैराना से पलायन हुआ या नहीं।

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