Veer Savarkar Jayanti 2022: वीर सावरकर को विनायक दामोदर सावरकर के नाम से भी जाना जाता है। वीर सावरकर एक स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ, वकील, लेखक, समाज सुधारक और हिंदुत्व दर्शन के सूत्रधार थे। उनका जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र में नासिक के पास भागपुर गांव में हुआ था। उनके तीन भाई-बहन थे। वीर सावरकर ने 12 साल की आयु में वीर उपनाम अर्जित किया था। जब उन्होंने एक समूह के खिलाफ छात्रों का नेतृत्व किया। जिन्होंने उनके गांव पर हमला किया था। आइए उनके जीवन के बारे में कुछ तथ्य देखें।

1. 1901 में विनायक दामोदार सावरकर ने यमुनाबाई से शादी की, जो रामचंद्र त्रयंबर चिपलूनकर की बेटी थीं।

2. 1923 में सावरकर ने हिंदुत्व शब्द की स्थापना की। कहा कि भारत केवल उन्हीं का है, जिनके पास यह पवित्र भूमि और उनकी पितृभूमि है।

3. वीर सावरकर ने अपनी पुस्तक हिंदुत्व में दो राष्ट्र सिद्धांत की स्थापना की। जिसमें हिंदुओं और मुसलमानों को दो अलग-अलग राष्ट्र कहा गया। 1937 में हिंदू महासभा ने इसे एक प्रस्ताव के रूप में पारित किया।

4. वीर सावरकर ने राष्ट्रध्वज तिरंगे के बीच में धर्म चक्र लगाने का सुझाव दिया था। जिसे राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने माना था।

5. सावरकर पहले राजनीतिक बंदी थे। जिन्हें फ्रांस पर बंदी बनाने के कारण हेग के इंटरनेशनल कोर्ट में मामला पहुंचा।

6. वे पहले क्रांतिकारी थे। जिन्होंने देश के विकास का चिंतन किया। बंदी जीवन समाप्त होते ही कुरीतियों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया।

7. वीर सावरकर ने अंडमान के एकांत कारावास में जेल की दीवारों पर कील और कोयले के कविताएं लिखी थी। फिर उन्हें याद किया। जेल से छुटने के बाद पुनः कविताओंको लिखा।

8. सावरकर द्वारा लिखी गई पुस्तक द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस-1857 एक सनसनीखेज किताब रही।

9. वे विश्व के पहले ऐसे लेखक थे। जिनकी कृति 1857 का प्रथम स्वतंत्रता को 2 देशों ने प्रकाशन से पहले ही प्रतिबंधित कर दिया था।

10. उनकी स्नातक उपाधि को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण अंग्रेज सरकार ने वापस ले लिया था।

11. वीर सावरकर पहले भारतीय राजनीतिज्ञ थे। जिन्होंने विदेशी वस्त्रों की होली जलाई थी।

12. वीर सावरकर ने इंग्लैंड के राजा के प्रति वफादारी की शपथ लेने से मना कर दिया था। जिस कारण उन्हें वकालत करने से रोक दिया गया था।

वीर सावरकर के अनमोल विचार

महान लक्ष्य के लिए गया कोई भी बलिदान व्यर्थ नहीं जाता है। - वीर सावरकर

उन्हें शिवाजी को मनाने का अधिकारी है। जो शिवाजी की तरह अपनी मातृभूमि को आजाद कराने के लिए लड़ने के लिए तैयार हैं। - वीर सावरकर

अपने देश की, राष्ट्र की, समाज की स्वतंत्रता हेतु प्रभु से की गई मूक प्रार्थना भी सबसे बड़ी अहिंसा का द्योतक है। - वीर सावरकर

देश हित के लिए अन्य त्यागों के साथ जन-प्रियता का त्याग करना सबसे बड़ा और ऊंचा आदर्श है। - वीर सावरकर

हमारे देश और समाज के माथे पर एक कलंक है- अस्पृश्यता। हिंदू समाज के, धर्म के, राष्ट्र के करोड़ों हिंदू बंधु इससे अभिशप्त हैं। जब तक हम ऐसे बनाए हुए हैं। तब तक हमारे शत्रु हमें परस्पर लड़वाकर, विभाजित करके सफल होते रहेंगे। इस घातक बुराई को हमें त्यागना होगा।

Posted By: Navodit Saktawat

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