
मल्टीमीडिया डेस्क। शराब कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ ब्रिटेन की अदालत की कार्रवाई से उसके प्रत्यर्पण की उम्मीदें बंधी हैं। हालांकि भारत को ऐसे कई माल्या का सालों से इंतजार है, लेकिन ऐसे लोग ब्रिटेन में रहकर भारतीय कानून के शिकंजे से बचे हुए हैं।
पिछले साल ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे जब भारत आई थीं, तब भारत ने ब्रिटेन को 57 भगोड़ों की सूची सौंपी है। ब्रिटेन ने भी ऐसे 17 भगोड़ों की लिस्ट दी थीं, जो ब्रिटेन की अदालत में दोषी हैं। दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण की संधि 1992 से है। लेकिन पिछले 25 सालों में ब्रिटेन ने महज एक भगोड़े को भारत को सौंपा है।
पिछले साल वर्ष 2002 के गुजरात दंगों के एक आरोपी समीर पटेल ऐसा पहला आरोपी है, जिसे अक्टूबर 2016 में भारत प्रत्यर्पित किया गया। 9 अगस्त 2016 को स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। उसके प्रत्यर्पण का मामला थोड़ा अलग भी था। भारत के अनुरोध को उसने ब्रिटेन में चुनौती नहीं दी थी।
वहीं दूसरी तरफ भारत अब तक दो लोगों को ब्रिटेन को सौंप चुका है। साल 2008 में भारत हाना फॉस्टर की हत्या के आरोपी भारतीय मनिंदरपाल सिंह कोहली और भारतीय मूल के एस. देववानी को ब्रिटेन को सौंपा गया था। देवनानी पर ब्रिटेन मूल की अपनी पत्नी की हनीमून के दौरान हत्या करने का आरोप था।
जानिए क्या है एमएलएटी :
22 सितंबर, 1992 को भारत और ब्रिटेन के बीच म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (एमएलएटी) हुई। इसके तहत दोनों देशों के बीच आपराधिक मामलों में आरोपी और वांछित व्यक्ति के प्रत्यर्पण को लेकर सहमति बनी।
प्रत्यर्पण के कई चरण :
- ब्रिटेन में प्रत्यर्पण के कई चरण होते हैं। इस साल फरवरी में भारत द्वारा की गई माल्या के प्रत्यर्पण की मांग को ब्रिटेन ने प्रमाणित किया और उसे डिस्ट्रिक्ट जज के पास आगे की कार्रवाई के लिए भेजा।
- डिस्ट्रिक्ट जज ही तय करता है कि मामले में व्यक्ति के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाए या नहीं।
- वारंट जारी होते ही आरोपी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है। उसे प्रारंभिक सुनवाई के लिए कोर्ट में पेश किया जाता है। माल्या के खिलाफ भी जज ने वारंट जारी किया और उन्हें कोर्ट में पेश किया गया।
- प्रारंभिक सुनवाई के बाद प्रत्यर्पण पर सुनवाई होती है। फिर अंतिम निर्णय सेक्रेटरी ऑफ स्टेट लेता है।
- इस दौरान किसी भी निर्णय के खिलाफ आरोपी व्यक्ति बड़ी अदालतों में अपील कर सकता है।
ब्रिटेन के पास अटके पड़े प्रत्यर्पण के अन्य मामले
1. सुधीर चौधरी (67) : हथियार डीलर और मध्यस्थ, लिबरल डेमोक्रेट्स पार्टी का बड़ा दानदाता। सौदों के लिए रोल्स रॉयस और मिग जैसी रक्षा कंपनियों से कथित रूप से रिश्वत लेने का आरोपी। 2006 से लंदन में रह रहे हैं। अब ब्रिटेन की नागरिकता भी हासिल कर ली है। उनके खिलाफ सीबीआइ ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया हुआ है।
2. नदीम सैफी (52) : बॉलीवुड के पूर्व संगीत निर्देशक और अब परफ्यूम कारोबारी। कैसेट कारोबारी गुलशन कुमार की हत्या में शामिल होने का आरोप। 1997 से लंदन में रह रहे थे और बाद में ब्रिटेन की नागरिकता भी हासिल कर ली। फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रह रहे हैं। साल 2000 में ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट ने उनके प्रत्यर्पण के अनुरोध को ठुकरा दिया था।
3. रवि शंकरन (52) : नौसेना के पूर्व कमांडर और हथियार डीलर। नौसेना वॉर रूम लीक मामले में जासूसी का आरोप। 2006 से लंदन में रह रहे हैं।
4. टाइगर हनीफ (55) : अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम का सहयोगी और गुजरात में 1993 में हुए विस्फोटों व अन्य आतंकवादी गतिविधियों का आरोपी। 1996 से लंदन में रह रहा है। बाद में ब्रिटिश पासपोर्ट भी हासिल कर लिया। पिछले तीन सालों से उसके प्रत्यर्पण के कागजात ब्रिटेन के गृह सचिव के समक्ष लंबित हैं।
5. ललित मोदी (50) : उद्योगपति और इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) के संस्थापक। मनी लांड्रिंग, वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपी। 2010 से लंदन में रह रहे हैं। एक कानूनी फर्म में निवेश किया है और स्थायी नागरिकता हासिल करने के करीब।
बैंकों का माल्या पर बकाया (करोड़ रुपए में)
1. भारतीय स्टेट बैंक- 1650
2. पंजाब नेशनल बैंक- 800
3. आइडीबीआइ बैंक- 800
4. बैंक ऑफ इंडिया- 650
5. बैंक ऑफ बड़ौदा- 550
6. यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया- 430
7. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया- 410
8. यूको बैंक- 320
9. कॉरपोरेशन बैंक- 310
10. स्टेट बैंक ऑफ मैसूर- 150
11. इंडियन ओवरसीज बैंक- 140
12. फेडरल बैंक- 90
13. पंजाब एंड सिंध बैंक- 60
14. एक्सिस बैंक- 50