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प्राइवेट स्पेस सेक्टर में भारत की बड़ी छलांग, 'विक्रम-1' ने पहली ही बार में 6 सैटेलाइट्स को उनकी कक्षा में पहुंचाया

हैदराबाद आधारित स्पेस स्टार्टअप 'स्काईरूट एयरोस्पेस' द्वारा विकसित 'विक्रम-1' रॉकेट ने श्रीहरिकोटा से अंतरिक्ष के लिए सफलतापूर्वक उड़ान भरी। यह पृथ्वी...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Sun, 19 Jul 2026 09:40:22 AM (IST)Updated Date: Sun, 19 Jul 2026 09:40:22 AM (IST)
प्राइवेट स्पेस सेक्टर में भारत की बड़ी छलांग, 'विक्रम-1' ने पहली ही बार में 6 सैटेलाइट्स को उनकी कक्षा में पहुंचाया
स्काईरूट ने रचा इतिहास। (PTI)

HighLights

  1. अंतरिक्ष में भारत ने नया इतिहास रच दिया है
  2. प्राइवेट रॉकेट 'विक्रम-1' की सफल लॉन्चिंग
  3. पहली ही बार में स्काईरूट को मिली सफलता

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के अंतरिक्ष अभियान में शनिवार को एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। हैदराबाद आधारित स्पेस स्टार्टअप 'स्काईरूट एयरोस्पेस' द्वारा विकसित 'विक्रम-1' रॉकेट ने श्रीहरिकोटा से अंतरिक्ष के लिए सफलतापूर्वक उड़ान भरी। इस ऐतिहासिक लॉन्चिंग के साथ ही 'विक्रम-1' पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में पहुंचने वाला भारत का पहला निजी रॉकेट बन गया है।

35 मिनट के तनाव के बाद मिली बड़ी सफलता

इस ऐतिहासिक पल से पहले काउंटडाउन के दौरान वैज्ञानिकों को भारी तनाव से गुजरना पड़ा। शनिवार दोपहर लॉन्चिंग के तय समय से महज 5 मिनट पहले एक तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण पूरी प्रक्रिया को रोकना पड़ा। लगभग 35 मिनट की देरी और गहन तकनीकी जांच के बाद लॉन्चिंग दोबारा शुरू की गई।


दोपहर ठीक 12:05 बजे 'विक्रम-1' ने श्रीहरिकोटा के पहले लॉन्चपैड से गरजते हुए आसमान की ओर रुख किया। स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने इस पहले ऑर्बिटल मिशन को 'मिशन आगमन' नाम दिया था।

कक्षा में स्थापित किए 6 उपग्रह

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य उपग्रहों को उनकी तय कक्षा में पहुंचाना था। रॉकेट ने अपनी क्षमता साबित करते हुए अपने साथ ले जाए गए 6 सैटेलाइट्स को पृथ्वी की सतह से 450 किलोमीटर ऊपर उनकी निर्धारित कक्षाओं में पूरी सटीकता के साथ स्थापित कर दिया।

वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ा कद

इस कामयाबी के साथ ही स्काईरूट एयरोस्पेस दुनिया की उन गिने-चुने अंतरिक्ष संगठनों की फेहरिस्त में शामिल हो गया है, जिन्होंने अपने पहले ही प्रयास में ऑर्बिटल लॉन्चिंग की कठिन चुनौती को पार किया है। वैश्विक स्तर पर भी यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

अब अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा ऐसा देश बन गया है, जिसके निजी क्षेत्र के पास अंतरिक्ष की कक्षा में रॉकेट भेजने की स्वदेशी क्षमता मौजूद है। यह सफलता देश के निजी स्पेस सेक्टर के लिए नए रास्ते खोलेगी।