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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 28, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

वीरभद्र का महरौली का फार्म हाऊस भी जांच के दायरे में

वीरभद्र सिंह के बेटे और बेटी की कंपनी के नाम दिल्ली के महरौली में खरीदा गया साढ़े छह करोड़ रुपये का फार्म हाऊस भी सीबीआई जांच के दायरे में है।

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Publish Date: Mon, 28 Sep 2015 09:59:46 PM (IST)Updated Date: Tue, 29 Sep 2015 07:00:41 AM (IST)
वीरभद्र का महरौली का फार्म हाऊस भी जांच के दायरे में

नीलू रंजन, नई दिल्ली। सिर्फ छह करोड़ की एलआईसी पालिसी ही नहीं, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे और बेटी की कंपनी के नाम दिल्ली के महरौली में खरीदा गया साढ़े छह करोड़ रुपये का फार्म हाऊस भी सीबीआई जांच के दायरे में है। वर्ष 2011 में खरीदे गए इस फार्म के लिए लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपये नकद दिए गए थे। बेचने वाले व्यक्ति ने खुद आयकर विभाग को दिए बयान में इसका खुलासा किया है। बयान की यह प्रति सीबीआई के पास मौजूद है।

सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि महरौली के डेरा मंडी गांव के लिंगायस सोसाइटी में मैपल डेस्टीनेशन एंड ड्रीमलैंड प्राइवेट लिमिटेड ने अगस्त 2011 में 6.61 करोड़ रुपये में एक फार्म खरीदा था। यह कंपनी वीरभद्र सिंह के बेटे और बेटी के नाम है लेकिन फर्म सिर्फ कागजों पर है। फार्म हाउस बेचने वाले पिचेश्वर गड्डे ने अपने बयान में बताया कि इसके लिए उसे 5.41 करोड़ रुपये नकद दिए गए थे और 1.20 करोड़ रुपये की रजिस्ट्री की गई थी।


पिचेश्वर के अनुसार नकद रकम वीरभद्र सिंह के करीबी वकामुल्ला चंद्रशेखर ने दिए थे। शनिवार को सीबीआई ने वकामुल्ला के तीन ठिकानों की तलाशी ली थी। इसके साथ ही आयकर विभाग ने पिचेश्वर को 2008 में यह फार्म हाउस बेचने वाली जया शर्मा का भी बयान दर्ज किया है। जया शर्मा ने बताया है कि उसने यह फार्म हाऊस 3.15 करोड़ में बेचा था, जिसमें केवल 1.05 करोड़ की रजिस्ट्री की गई थी।

सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि फार्म हाउस खरीदने के लिए 5.41 करोड़ रुपये नकद देने वाले वकामुल्ला चंद्रशेखर पहले से निशाने पर हैं और शनिवार को वीरभद्र सिंह के साथ-साथ उनके तीन ठिकानों की भी तलाशी ली गई थी। उनके अनुसार आयकर विभाग ने वीरभद्र सिंह और वकामुल्ला के बीच पैसे की लेन-देन की गहन पड़ताल की है और उन कागजी कंपनियों को खोज निकाला है, जिसके माध्यम से वह वीरभद्र सिंह के लिए पैसे को सफेद-काला किया करता था। इन कंपनियों के निदेशकों ने भी अपने बयान में सारी सच्चाई बयान कर दी है।

सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सारे सबूतों से साफ है कि महरौली का फार्म हाउस खरीदने के लिए काले धन का उपयोग किया गया था और इसे वीरभद्र सिंह की आय में जोड़ कर देखा जाएगा, जो यह छह करोड़ रुपये की एलआईसी से अलग है। चूंकि यह फार्म हाउस 2011 में खरीदा गया था, इसीलिए इसे उनके स्टील मंत्री रहने के दौरान आमदनी से जोड़कर देखा जाएगा।