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Weather Update: आसमान से बरसेगी आग! सबसे गर्म देशों की लिस्ट में टॉप पर होगा भारत

Weather Report: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के नए अध्ययन के अनुसार, यदि वैश्विक तापमान 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ता है तो भारत सबसे अधिक भीषण गर्मी से प्रभावित द...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sat, 07 Mar 2026 07:30:37 AM (IST)Updated Date: Sat, 07 Mar 2026 07:39:36 AM (IST)
Weather Update: आसमान से बरसेगी आग! सबसे गर्म देशों की लिस्ट में टॉप पर होगा भारत
Weather Update:भीषण गर्मी की मार झेलने वाले देशों में भारत होगा सबसे ऊपर (AI Generated Image)

HighLights

  1. 2050 तक दुनिया की 41 प्रतिशत आबादी भीषण गर्मी झेलेगी
  2. भारत गर्मी से सबसे अधिक प्रभावित देशों में पहले स्थान
  3. कूलिंग डिमांड बढ़ने से बिजली और एसी की जरूरत बढ़ेगी

संजीव गुप्ता, डिजिटल डेस्क: जलवायु परिवर्तन (Climate change) और लगातार बढ़ते वैश्विक तापमान को लेकर एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने भारत के सामने संभावित संकट की गंभीर तस्वीर पेश की है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि अगर पृथ्वी का औसत तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है, तो भीषण गर्मी (Weather Update) से सबसे अधिक प्रभावित देशों में भारत शीर्ष पर होगा।

यह अध्ययन नेचर सस्टेनेबिलिटी जर्नल में प्रकाशित हुआ है और इसमें बताया गया है कि आने वाले दशकों में दुनिया की बड़ी आबादी अत्यधिक गर्मी की परिस्थितियों में रहने को मजबूर हो सकती है।

2050 तक 41 प्रतिशत आबादी भीषण गर्मी में

अध्ययन के अनुसार, साल 2050 तक दुनिया की लगभग 41 प्रतिशत आबादी, यानी करीब 3.8 अरब लोग, अत्यधिक गर्मी की स्थिति में जीवन बिताने को मजबूर होंगे। तुलना करें तो साल 2010 में यह आंकड़ा केवल 23 प्रतिशत था।

शोधकर्ताओं का मानना है कि बढ़ते तापमान का असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह मानव जीवन, अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव डालेगा।

भारत क्यों है सबसे अधिक संवेदनशील

शोधकर्ताओं के अनुसार भारत की विशाल जनसंख्या और पहले से ही गर्म जलवायु इसे अत्यधिक संवेदनशील बनाती है। तापमान बढ़ने की स्थिति में भारत जैसे देशों में हीट स्ट्रेस से जुड़ी बीमारियों और मौतों का खतरा तेजी से बढ़ सकता है।


अध्ययन में कहा गया है कि अगर वैश्विक तापमान लगातार बढ़ता रहा तो भारत में गर्मी से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं और भी गंभीर हो सकती हैं।

कूलिंग की मांग में होगी भारी बढ़ोतरी

अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. जीसस लिजाना के अनुसार, भारत में कूलिंग डिग्री डेज यानी गर्मी से बचाव के लिए जरूरी ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ेगी।

इसका अर्थ है कि आने वाले वर्षों में घरों, कार्यालयों और सार्वजनिक इमारतों को ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में बिजली और एयर कंडीशनर की आवश्यकता होगी। इससे ऊर्जा की खपत बढ़ेगी और अगर ऊर्जा स्रोत स्वच्छ नहीं हुए तो कार्बन उत्सर्जन भी बढ़ सकता है।

स्वास्थ्य, शिक्षा और खेती पर असर

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर राधिका खोसला ने चेतावनी दी है कि यदि तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक की वृद्धि होती है तो इसके प्रभाव व्यापक और गंभीर होंगे।

उन्होंने कहा कि इससे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि उत्पादन और लोगों के विस्थापन जैसे मुद्दों पर अभूतपूर्व प्रभाव पड़ सकता है। अधिक गर्मी के कारण फसलों के नुकसान, काम करने की क्षमता में कमी और हीट स्ट्रेस जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाएगा।

अगले पांच वर्ष बेहद महत्वपूर्ण

वैज्ञानिकों के अनुसार तापमान वृद्धि के प्रभाव 1.5 डिग्री की सीमा पार होने से पहले ही स्पष्ट दिखाई देने लगेंगे। आने वाले पांच वर्षों में ही लाखों घरों को कूलिंग सिस्टम की आवश्यकता पड़ सकती है।

इससे ऊर्जा की मांग और कार्बन उत्सर्जन दोनों में तेजी से वृद्धि हो सकती है, जो जलवायु संकट को और गंभीर बना सकती है।

किन देशों पर होगा सबसे ज्यादा असर

अध्ययन के मुताबिक भारत के अलावा नाइजीरिया, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश और फिलीपींस जैसे अधिक जनसंख्या वाले देशों पर भी अत्यधिक गर्मी का बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। वहीं ब्राजील और दक्षिण सूडान जैसे देशों में तापमान वृद्धि की गति सबसे तेज होने की आशंका जताई गई है।

समाधान के लिए जरूरी कदम

शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि सरकारों को जल्द से जल्द नेट जीरो उत्सर्जन की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। इसके साथ ही शहरों के बुनियादी ढांचे और भवनों को इस तरह डिजाइन करना होगा कि वे बढ़ती गर्मी का सामना कर सकें और ऊर्जा की खपत कम हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन भारत जैसे विकासशील देशों के लिए एक चेतावनी है, जहां बढ़ती गर्मी अब केवल मौसम की समस्या नहीं बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है।