कोलकाता। पश्चिम बंगाल में एक और बड़ा विवाद उपजा है। यहां आठवीं कक्षा की किताब में खुदीराम बोस जैसे क्रांतिकारी को 'आतंकी' बता दिया गया है। किताब का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है और इस बहाने लोग मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साध रहे हैं। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी चुप हैं, वहीं सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। इतिहासकार जीवन मुखर्जी के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया गया है।

विवादित पाठ्यपुस्तक लिखने वाले शिक्षक निर्मल बनर्जी की सफाई है कि ब्रिटिश सरकार ने खुदीराम बोस को 'आतंकवादी' कहा था, उन्होंने उसी तथ्य का उल्लेख किया है। वे इतिहास से छेड़छाड़ नहीं कर सकते। यह शिक्षकों का काम है कि बच्चों को आतंकवादी और क्रांतिकारी में अंतर समझाए।

बहरहाल, सरकार की ओर से कहा गया है कि पूरी किताब की समीक्षा यह टीम करेगी और गलतियों को सुधार कर नए सिरे से प्रकाशन की अनुशंसा की जाएगी। मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर यह कमेटी काम करेगी। पाठ्यक्रम में इस्तेमाल की गई भाषा सहज और समझ में आने लायक है या नहीं, यह देखा जाएगा। पांचवीं श्रेणी से लेकर 12वीं तक की इतिहास की पुस्तकों कई नए पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है, जिनमें सिंगुर से लेकर कई ऐसे आंदोलन शामिल हैं, जिनका नेतृत्व ममता बनर्जी ने किया है। उन तथ्यों की भी समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही आठवीं कक्षा की इतिहास की पुस्तक में खुदीराम बोस को 'आतंकवादी' के तौर पर चिह्नित किया गया है। उसे भी सुधारने का उपाय तलाशा जाएगा।

इसके पहले 'फ्लाइंग सिख' के नाम से मशहूर धावक मिल्खा सिंह की जगह उनपर बनी फिल्म में उनका किरदार निभाने वाले अभिनेता को ही किताब में मिल्खा सिंह बता दिया गया था। हालांकि, वह निजी प्रकाशन की किताब थी। इसकेअलावा कई अन्य क्रांतिकारियों को भी इसी तरह से आतंकवादी के तौर पर स्कूलों की किताबों में चिह्नित किया गया है। आरोप लगता रहा है कि इतिहास लिखने वाले वामपंथी इतिहासकारों ने क्रांतिकारियों का अपमान करने के लिए सोची-समझी साजिश के तहत इतिहास में आजादी के नायकों को गलत तरीके से परिभाषित किया है।

Posted By: Arvind Dubey