धर्म के आधार पर भारत का बंटवारा कर मुसलमानों के लिए पाकिस्तान बनाने के प्रस्ताव में एक बात ऐसी भी थी, जिसे यदि मान लिया जाता तो भारत वैसा न होता जैसा कि आज है। यह प्रस्ताव मुस्लिम लीग के नेता और अलग देश पाकिस्तान की मांग करने वाले मोहम्मद अली जिन्ना ने रखा था।

जिन्ना ने अंग्रेज हुकूमत, महात्मा गांधी और कांग्रेस के तत्कालीन बड़े नेताओं को स्पष्ट रूप से कहा था कि उन्हें पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) और पश्चिमी पाकिस्तान (वर्तमान पाक) को भौगोलिक रूप से जोड़ने के लिए भारत के बीच से होकर 800 किलोमीटर का कॉरीडोर दिया जाए।

जिन्ना का तर्क था कि इसके बिना पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान में आवाजाही कैसे होगी? दरअसल, जिन्ना की कोशिश थी कि जूनागढ़ रियासत (अब गुजरात), भोपाल रियासत (अब मप्र) सहित कुछ मुस्लिम बहुल रियासतों को जोड़कर एक कॉरीडोर बनाया जाए जो उत्तर और दक्षिण भारत के बीच से गुजरे।

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इस तरह भारत एक होकर भी एक न रहता और कॉरीडोर से दो हिस्सों में बंट जाता। इस अव्यावहारिक प्रस्ताव का पुरजोर विरोध हुआ। तत्कालीन वायसराय माउंटबेटन ने भी इसे सिरे से खारिज कर दिया, वहीं सरदार वल्लभ भाई पटेल व अन्य कद्दावर नेताओं ने इसे मूर्खतापूर्ण करार दिया।

कड़े विरोध के कारण इस पर विचार भी नहीं किया गया और आखिरकार जिन्ना का चालाकीपूर्ण प्रस्ताव बुरी तरह खारिज हो गया।

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