
शिमला। शिमला में जेल के खाने को खाने वाले लोगों की भीड़ जमा होती है। मगर, कम ही लोगों को पता होता है कि वे जो खाना खा रहे हैं, वह जेल का खाना है। दरअसल, यहां के कुछ कैदियों को ओपन जेल सिस्टम यानी खुली जेल व्यवस्था के तहत छोड़ दिया जाता है। ये ऐसे कैदी होते हैं, जिन्होंने कोई संगीन जुर्म नहीं किया होता है। वे दिन भर जेल से बाहर रहकर काम करते हैं और रात को लौटकर जेल में चले आते हैं।
शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज के पास भूपिंदर सिंह 25 रुपए में चावल, करी और राजमा बेचते हैं। यहां खाना खा रहे कम लोगों को पता है कि यह 'जेल का खाना' है। भूपिंदर सिंह ने बताया कि 'जब हम लोगों को बताते हैं कि हम सजायाफ्ता हैं, तो उनका सवाल होता है कि आपको बाहर कैसे छोड़ा गया?
भूपिंदर कैथू जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। उन्हें साल 2000 में पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में दोषी पाया गया था। भूपिंदर हिमाचल प्रदेश के उन 150 कैदियों में शामिल हैं, जो इस ओपन जेल सिस्टम का हिस्सा हैं। उन्हें जेल परिसर से बाहर जाने और पैसा कमाकर रात में वापस बैरक लौटने की इजाजत है।
भूपिंदर की तरह ही अन्य कैदी फैक्ट्री में काम करते हैं, पढ़ाते हैं और मोबाइल लंच वैन चलाते हैं। कई तो ऐसे हैं, जो कैफे में काम करते हैं। पिछले साल खुला द बुक कैफे अब स्थानीय लोगों का लोकप्रिय ठिकाना बन चुका है और बड़ी संख्या में लोग कॉफी या चाय पीने के लिए यहां आते हैं। पत्नी की हत्या के अपराध में सजा काट रहे जय चंद अन्य कैदियों की मदद से यह कैफे चलाते हैं।
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जयचंद ने बताया कि शुरू में लोग यहां आने से झिझकते थे। मगर, अब बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार के साथ हमारे कैफे में आने लगे हैं। जयचंद अक्सर ध्यान और कैथू जेल की कैंटिन में काम करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेरा समय बेहद खराब गुजरा है, लेकिन लोगों से मिलकर और उनसे बात करके मुझे बहुत खुशी होती है।
इसी तरह राम लाल भी हत्या के दोषी हैं और 18 साल की सजा काट रहे हैं। मगर, ओपन जेल सिस्टम के तहत वह दो साल पहले जेल से बाहर निकले थे और जेल की बेकरी में तैयार बिस्कुट बेचते हैं। हिमाचल प्रदेश के डीजीपी (जेल) सोमेश गोयल बताते हैं कि जेल की दीवारों पर एक कहावत लिखी है- 'खाली दिमाग, शैतान का घर।'
इसी वजह से उनके मन में हिमाचल प्रदेश के खुली जेल व्यवस्था शुरू करने का विचार आया। उन्होंने कहा कि एक अपराधी को कैद में रखना न्याय का महत्वपूर्ण हिस्सा है लेकिन हमें अपराधियों के साथ मानवीय व्यवहार करना चाहिए और उन्हें एक ऐसा नागरिक बनाना चाहिए जो अपना भरण-पोषण कर सकें।
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