आनंद राय, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के सबसे बड़े सिंबल बन गए नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण के निलंबित प्रमुख अभियंता यादव सिंह यूं तो बसपा सरकार में बेहद प्रभावी थे लेकिन छेड़छाड़ में आईएएस दामाद की गिरफ्तारी के बाद सपा सरकार में भी दखल रखने लगे।
वह अपने दामाद को बचाने के लिए समाजवादी सत्ता के शरणागत हुए तो फिर कई दिग्गजों को अपने शीशे में ढालने में कामयाब हो गए। न केवल दामाद को राहत दिला दी बल्कि पटरी से उतरी उनकी गाड़ी भी दौड़ने लगी। वर्ष 1980 में बतौर अवर अभियंता अपना करियर शुरू करने वाले यादव सिंह 22 साल की सेवा में चीफ मेंटीनेंस इंजीनियर के पद तक पहुंचे थे लेकिन 2011 में बसपा सरकार ने उन्हें प्रमुख अभियंता बना दिया।
वर्ष 2012 में सत्ता में आने के बाद यादव सपा सरकार की आंख की किरकिरी बन गए। उन्हें निलंबित कर दिया गया। उनके खिलाफ मुकदमे और जांच होने लगी।
बड़े नेता से रिश्ते के बाद दबदबा
यादव सिंह ने सपा सरकार में प्रभावी एक पुलिस अफसर के जरिये घुसपैठ की और फिर दिल्ली-नोएडा में दखल रखने वाले एक बड़े नेता से मधुर रिश्ते बना लिए। इस संपर्क के जरिये यादव ने अपने दामाद को बचा लिया। शशि भूषण पर आरोप लगाने वाली युवती ने न केवल अपना बयान बदला बल्कि शशि भूषण के मामले को रफा-दफा करके उन्हें बहाल भी कर दिया गया।
इसके बाद यादव सिंह को सरकार के कुछ भरोसेमंद आईएएस अफसरों के करीब आने का मौका मिला और एक दिन वह भी मौका आया कि सरकार ने घोषित रूप से उन पर भरोसा जता दिया। नवंबर 2014 को यादव सिंह को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण का प्रमुख अभियंता बना दिया गया। इधर, शशि भूषण को कई महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती मिल गई।
जेल गए, निलंबित हुए दामाद
अक्टूबर 2012 में लखनऊ मेल ट्रेन से दिल्ली से लखनऊ लौटते समय यादव सिंह के आईएएस दामाद शशि भूषण लाल ने लखनऊ निवासी एक युवती से छेड़खानी कर दी। शशि भूषण के खिलाफ जीआरपी लखनऊ ने मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया, वहीं सरकार ने भी निलंबित कर दिया था।
दिग्गज नहीं चाहते थे सीबीआई जांच
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव शुरू से यादव सिंह जैसे भ्रष्टाचारियों के खिलाफ थे लेकिन सरकार में प्रभाव रखने वाले कुछ दिग्गज नहीं चाहते थे कि यादव सिंह के भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच हो। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने तो यहां तक टिप्पणी कर दी कि लगता है कि यादव सिंह ने पूरी व्यवस्था को दास बना लिया है।
सरकार ने हाई कोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का भी मन बना लिया था। प्रयास चल रहे थे कि इसी बीच सीबीआई ने मुकदमा दर्ज कर छापेमारी शुरू कर दी।