
नई दिल्ली। इस इस सोमवार को यानी 14 नवंबर की रात को चांद ज्यादा बड़ा और चमकीला दिखेगा। यानी इस पूर्णमासी की चांदनी आप भूल नहीं पाएंगे। आपको बता दे कि इससे पहले सुपर मून की यह रौनक आखिरी बार 1948 में देखी गई थी।
विशेषज्ञ बता रहे हैं कि इस रात को दिखने वाला चांद आम पूर्णमासी को दिखने वाले चांद की तुलना में 14 फीसद ज्यादा बड़ा और 30 फीसद तक ज्यादा चमकीला दिखेगा। सुपर मून शब्द का पहली बार प्रयोग करीब 30 साल पहले एस्ट्रोलॉजर रिचर्ड नोएल ने किया था।
दरअसल, इस स्थिति में चंद्रमा धरती के काफी करीब आ जाता है क्योंकि धरती की कक्षा पूरी तरह से गोल न होकर दीर्धवत्ताकार है। जब चंद्रमा धरती के काफी करीब होता है, तो वह ज्यादा चमकीला और बड़ा दिखाता है, जिसे सुपर मून कहा जाता है।
झारखंड में ब्लैक मनी रखने वालों ने नाले में बहाए नोट
चांद की इस खूबसूरती को निहारने के लिए सूर्यास्त के बाद पूर्व दिशा में करीब आठ बजे के आस-पास देखिएगा। यह अनुमान लगाया गया है कि उत्तरी गोलार्द्ध में सूर्यास्त के बाद चंद्रमा उदित होगा, जबकि दक्षिणी में सूर्यास्त से पहले चंद्रमा उदित होगा।
चंद्रमा करीब 8.09 बजे 356,111 किमी की दूरी पर धरती के पास से गुजरेगा। यानी देखा जाए, तो साल 1948 के बाद यह धरती के काफी करीब से गुजरेगा। आम तौर पर, सुपर मून चमकीली पूर्णमासी की तुलना में 15 फीसद तक अधिक चमकीला दिखता है और यही वजह है कि फुल मून में चांद की छटा देखने लायक होती है।